कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अमेरिकी बयान पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा अमेरिका ने निर्दोष भारतीयों की मौत पर कोई अफसोस नहीं जताया। उन्होंने सवाल उठाया कि एक रणनीतिक साझेदार देश निर्दोष भारतीयों की मौत पर इतना संवेदनहीन कैसे हो सकता है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अमेरिकी विदेश विभाग के एक आधिकारिक बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। यह बयान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के बीच हुई बातचीत के बाद आया है। थरूर ने इस बयान को बेहद चौंकाने वाला और दुखद बताया है।
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कांग्रेस सांसद ने क्या कहा?
थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अमेरिकी बयान में निर्दोष भारतीयों की जान जाने पर कोई दुख या संवेदना नहीं जताई गई है। उन्होंने सवाल किया कि एक दोस्त और रणनीतिक साझेदार इतना संवेदनहीन कैसे हो सकता है? थरूर के अनुसार, अगर कोई व्यापारिक जहाज नियमों का पालन नहीं कर रहा था, तो उसे रोकने के लिए जानलेवा हथियारों का इस्तेमाल क्यों किया गया?
उन्होंने सुझाव दिया कि जहाज को रोकने के लिए उसके इंजन या स्टीयरिंग को खराब किया जा सकता था। मिसाइल दागकर चालक दल के सदस्यों को मारना जरूरी नहीं था। थरूर ने इस बात पर जोर दिया कि इन समुद्री रास्तों से गुजरने वाले लगभग हर जहाज पर भारतीय क्रू सदस्य होते हैं। उन्होंने पूछा कि क्या अब इन सभी भारतीयों को अमेरिकी मिसाइलों का आसान निशाना मान लिया गया है?
Deeply shocking to read this official US statement, which contains absolutely no expression of regret or condolence for the loss of innocent Indian lives. How can a “friend” and strategic partner be so deeply insensitive?
अमेरिकी ने अपने बयान में क्या कहा था?
अमेरिकी बयान में कहा गया था कि मार्को रूबियो ने जयशंकर से होर्मुज जलडमरूमध्य की घटनाओं पर चर्चा की। रूबियो ने अपने बयान में कहा, सभी व्यापारिक जहाजों को अमेरिकी सेना के आदेशों का तुरंत पालन करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिकी पाबंदियों का उल्लंघन और ईरानी तेल का अवैध व्यापार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अमेरिका ने कहा कि वह इस क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
शशि थरूर ने अमेरिका के इस रवैये को पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मार्को रूबियो से बातचीत के दौरान भारत का कड़ा विरोध दर्ज कराया होगा। थरूर का मानना है कि रणनीतिक साझेदारी में इस तरह की संवेदनहीनता की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।