पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने पनामा पेपर मामले की जांच रिपोर्ट में दोषी ठहराए जाने के बावजूद इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। इस मामले की जांच रिपोर्ट में शरीफ और उनके परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार का केस दर्ज करने की सिफारिश की गई है।
शरीफ ने बृहस्पतिवार को बुलाई कैबिनेट की बैठक पनामा पेपर मामले की जांच करने वाली संयुक्त जांच दल (जेआईटी) की रिपोर्ट को ‘आरोपों और अटकलबाजियों’ का पुलिंदा करार दिया। डॉन ऑनलाइन के मुताबिक शरीफ ने विपक्षी दलों की ओर इशारा करते हुए कहा, पाकिस्तान की अवाम ने मुझे चुना है और वही मुझे पीएम पद से हटा सकती है।’
शरीफ ने दावा किया कि राजनीति में आने के बाद उनके परिवार ने कुछ भी नहीं हासिल किया है, बल्कि गंवाया बहुत कुछ है। उन्होंने कहा, ‘जेआईटी की रिपोर्ट में जो भाषा इस्तेमाल की गई है वह मेरे खिलाफ दुर्भावना को जाहिर करती है। जो लोग झूठे और बेबुनियाद आरोपों के आधार पर मेरा इस्तीफा मांग रहे हैं पहले उन्हें अपने गिरेबान में झांक लेना चाहिए। वेबसाइट के मुताबिक कैबिनेट के सहयोगियों ने उन्हें इस मामले में मुकदमा लड़ कर खुद को पाक-साफ साबित करने की सलाह दी।
पनामा पेपर मामले की जांच कर रही छह सदस्यीय संयुक्त जांच टीम ने 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में दस वॉल्यूम की रिपोर्ट सौंपी है। इसमें कहा गया है कि नेशनल अकाउंटबिलिटी ब्यूरो (एनएबी) अध्यादेश 199 के तहत शरीफ उनके दोनों बेटों हसन और हुसैन नवाज और बेटी मरियम के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया जाए।