विपक्षी नेता शरद यादव ने शनिवार को आरोप लगाया कि प्रवासी श्रमिकों को भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि उन्हें अपने गांव जाने के लिए यात्रा की अनुमति नहीं दी जा रही है जबकि उत्तर प्रदेश सरकार को राजस्थान के कोटा में पढ़ रहे छात्रों को वापस लाने की अनुमति दी गई है। शरद ने आरोप लगाया कि लॉकडाउन के उपायों को लागू करने में भी राजनीति की जा रही है।
लोकतांत्रिक जनता दल के नेता ने बयान जारी कर कहा कि छात्रों और श्रमिकों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को हर उस व्यक्ति की जिम्मेदारी लेनी चाहिए जो देश के विभिन्न हिस्सों में फंसा हुआ है। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर विवाह समारोहों का भी आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने प्रवासी श्रमिकों की दुर्दशा को रेखांकित किया है जिन्हें अपने घर लौटने से महाराष्ट्र और दिल्ली में रोक दिया गया है ।
शरद ने कहा, 'यह भेदभाव की पराकाष्ठा है, जो बर्दाश्त के योग्य नहीं है... जो सबसे अधिक व्याकुल करने वाला है वह है केंद्र सरकार का विदेशों से अपने नागरिकों को विमान में लेकर वापस आना, क्योंकि वे संपन्न परिवारों के लोग हैं। कुछ राज्य अपने छात्रों और अन्य को आलीशान बसों में वापस लेकर आ रहे हैं, दूसरी तरफ वे श्रमिक हैं जो पैदल अपने घरों की ओर जाने के लिए मजबूर हैं और उन्हें अलग-अलग स्थानों पर पुलिस की लाठी भी मिल रही है ।