फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शरद यादव के बागी तेवर से JDU में कड़वाहट हुई तेज, नीतीश की भी नहीं मान रहे हैं बात

Wed, 09 Aug 2017 06:54 AM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
विज्ञापन
sharad yadav
विज्ञापन
कद्दावर वरिष्ठ सांसद शरद यादव के तेवर लगातार बागी हुए हैं। वह जद(यू) में बने रहकर नीतिश कुमार द्वारा तय किए गठबंधन धर्म का पालन नहीं कर रहे हैं। उनके इस मिजाज के ,साथ पार्टी में कड़वाहट का दौर शुरू हो गया है।
विज्ञापन


शरद यादव के बेहद करीबी समझे जाने वाले पार्टी के नेता अरुण कुमार को मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने झटका दे दिया है। नीतिश के निर्देश पर पार्टी के महासचिव केसी त्यागी ने अरुण कुमार को महासचिव के पद से हटा दिया है।

केसी त्यागी ने पत्र लिखकर इसकी सूचना अरुण कुमार को दी है। त्यागी ने पत्र लिखकर कहा कि आपको पार्टी के अध्यक्ष नीतिश कुमार के आदेश पर महासचिव के पद से मुक्त किया जाता है। अरुण कुमार पार्टी के गुजरात प्रभारी थे।
विज्ञापन


उन्होंने राज्यसभा चुनाव के बाबत गुजरात के चुनाव पीठासीन अधिकारी को पत्र लिखकर पार्टी का एजेंट नियुक्त किए जाने की मांग की थी। हालांकि इसे नीतिश कुमार द्वारा शरद यादव को संकेत देने के तौर पर देखा जा रहा है। नीतिश कुमार जद(यू) अपना वर्चस्व दिखाना चाह रहे हैं। 
विज्ञापन

क्या नीतिश की परेशानी

nitish kumar
पार्टी के अंदरखाने के सूत्र बताते हैं कि जद(यू) के तमाम नेताओं को महागठबंधन से नाता तोडऩा तथा भाजपा से हाथ मिलाना पच नहीं रहा है। शरद यादव ऐसे नेताओं का लगातार केन्द्र बने हैं। मंगलवार को भी शरद यादव के तेवर विपक्ष का साथ देने वाले थे।

उन्होंने कांग्रेस के नेता कपिल सिब्बल द्वारा 500 के नोट वाले मुद्दे पर खुलकर विपक्ष का साथ दिया। उन्होंने राज्यसभा में कहा कि यह कोई छोटा मामला नहीं है। किसी भी देश में इस तरह की करेंसी के साथ गड़बड़ी नहीं होती। एक ही नोट छोटे-बड़े आकार के नहीं छापे जाते।

उन्होंने कहा कि इसका सरकार को जवाब देना होगा। खास बात यह भी रही कि शरद यादव की सीट नहीं बदली। वह विपक्ष के नेताओं की अगली पंक्ति में प्रो. राम गोपाल यादव के बगल ही बैठे दिखाई दिए।

इस तरह से शरद यादव ने जहां अपने रुख पर जद(यू) में रहकर अडऩे का संकेत दे दिया है, वहीं नीतिश कुमार ने अरुण कुमार पर कार्रवाई करके उन्हें अपने तेवर से अवगत कराया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में अभी कड़वाहट और बढ़ सकती है।


एनडीए के साथ पहले के गठबंधन की सरकार और बिहार की राजनीति में जद(यू) का भाजपा का वर्चस्व रहता था। दूसरी पारी में हालात बदल गए हैं। अब भाजपा का पलड़ा भारी दिखाई दे रहा है। दूसरे पूरे बिहार में लोग नीतिश कुमार को विकास पुरुष तो मानते हैं लेकिन महागठबंधन का टूटना उनके पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं को हजम नहीं हो रहा है।

बिहार प्रदेश भाजपा के एक बड़े नेता ने एक जद(यू) के नेता के सामने तंज कसा कि विभीषण राम भक्त थे, लेकिन कहे कुलद्रोही जाते हैं तो जद(यू) के नेता का चेहरा देखने लायक था। बताते हैं पार्टी के भीतर इसी तरह के तंज चल रहे हैं। ऐसे में नीतिश अब अपना तेवर सख्त रखना चाहते हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें