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'मुश्किल में है अर्थव्यवस्था, सरकार दिखा रही सुंदर तस्वीर': जीडीपी के आकड़ों पर शरद पवार का तंज, सरकार को घेरा

Thu, 03 Sep 2026 07:12 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, मुंबई

सार

एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने आरोप लगाया कि एक तरफ महंगाई लगातार बढ़ रही है और देश की आर्थिक स्थिति मुश्किल दौर से गुजर रही है, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार असली समस्याओं से ध्यान हटाकर अर्थव्यवस्था की ‘बहुत सुंदर तस्वीर’ पेश करने की कोशिश कर रही है।
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शरद पवार - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने  गुरुवार को केंद्र सरकार पर महंगाई और आर्थिक मुश्किलों जैसे वास्तविक मुद्दों से जनता का ध्यान हटाकर अर्थव्यवस्था की बेहतर तस्वीर पेश करने का आरोप लगाया। उन्होंने छात्रों के लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार, NEET मामलों में न्यायपालिका के फैसले, शिवसेना के चुनाव चिह्न विवाद और प्रशासनिक हस्तक्षेप को लेकर भी अपनी राय रखी। पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित बारामती दौरे, चीनी के आयात, गन्ना किसानों की स्थिति और मराठवाड़ा में सूखे की आशंका पर भी चिंता जताई। साथ ही उन्होंने दूध में मिलावट रोकने के लिए FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे की कार्रवाई का समर्थन किया।

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महंगाई और आर्थिक संकट से ध्यान भटकाने का आरोप
पुणे जिले में अपने गृहनगर बारामती में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पवार ने यह भी दावा किया कि लोगों का ध्यान मुख्य मुद्दों से हटाने के लिए सरकार की सहमति से कुछ मुद्दों को हवा दी जा रही है। आज राज्य और देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति मुश्किल है। महंगाई बढ़ रही है और परिवार के मुखिया के लिए रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल होता जा रहा है। इन सभी चीजों से ध्यान हटाने के लिए सरकार की सहमति से शिक्षा सहित कुछ मुद्दे उठाए जा रहे हैं, ताकि मुख्य मुद्दों को आसानी से नजरअंदाज किया जा सके। हम देख रहे हैं कि यह जानबूझकर किया जा रहा है।

7.8 प्रतिशत GDP विकास दर का पीएम मोदी ने किया जिक्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को 7.8 प्रतिशत की GDP विकास दर के लिए देश के लोगों की सराहना की थी। उन्होंने इस उपलब्धि को खास तौर पर प्रभावशाली बताया, क्योंकि यह वैश्विक उथल-पुथल, भू-राजनीतिक संघर्षों और आपूर्ति श्रृंखला में आई रुकावटों के बावजूद हासिल हुई है।
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'अर्थव्यवस्था की असली तस्वीर नहीं दिखाई जा रही'
प्रधानमंत्री मोदी के बयान का जिक्र करते हुए पवार ने कहा कि देश के वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि देश की अर्थव्यवस्था की तस्वीर बहुत सुंदर है। वे असली समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे हैं... ऐसा लगता है कि उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया है। 

अंतरराष्ट्रीय मंचों से ध्यान भटकाने का भी आरोप
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मौजूदा स्थिति से लोगों का ध्यान हटाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ बातें कहते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि लोगों को महंगाई की मार झेलनी पड़ेगी और इसका सीधा असर उनकी जेब पर महसूस होगा।

NEET प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले रद्द करने का फैसला
मंगलवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने 20 से 25 जुलाई के बीच हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामले रद्द कर दिए। पीठ ने केंद्र सरकार को यह निर्देश भी दिया कि आत्महत्या कर चुके NEET अभ्यर्थियों के परिवारों को तीन महीने के भीतर आर्थिक मुआवजा दिया जाए।

'छात्रों को लोकतांत्रिक तरीके से विरोध का अधिकार'
इस बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में पवार ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों को लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने की अनुमति दी जानी चाहिए। यह छात्रों का विरोध प्रदर्शन है और उनकी कुछ मांगें हैं। न्यायपालिका ने साफ तौर पर कहा है कि सरकार की अपनाई गई नीति गलत है। न्यायपालिका ने एक तरह से सरकार को कड़ी सलाह दी है कि अगर आप इस तरह से कोई फैसला नहीं लेते हैं, तो हमें कुछ फैसले लेने होंगे।
 
16 अक्टूबर को बारामती आ सकते हैं पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित बारामती दौरे के बारे में पवार ने कहा, 'उन्होंने कहा है कि वह आ रहे हैं। हमने उन्हें 16 अक्टूबर की तारीख दी है, लेकिन यह तारीख आगे-पीछे हो सकती है। यहां एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) संस्थान बनाया गया है, जो देश का पहला संस्थान है। वह इसका निरीक्षण करेंगे और उन्हें एक प्रेजेंटेशन दिया जाएगा।' पवार ने आगे कहा,'हमारे कुछ लोगों ने सुप्रिया (सुले) की बेटी की शादी में उन्हें अपना प्रेजेंटेशन दिया था। लेकिन वह इसे विस्तार से समझना चाहते हैं, इसलिए कार्यक्रम यहां रखा गया है। 

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मराठवाड़ा में सूखे की आशंका, किसानों की मदद की अपील
राज्य के कुछ हिस्सों में बारिश की कमी को लेकर पवार ने कहा,'मैं हर जगह जा रहा हूं। दोबारा बुआई तो दूर की बात है, ऐसा लगता है कि पानी और दूसरी दिक्कतें पैदा होंगी। ऐसा लगता है कि आज पूरा मराठवाड़ा सूखे की चपेट में आ जाएगा। हालात अच्छे नहीं हैं। लेकिन मुश्किल हालात का सामना कर रहे किसानों की हर किसी को मदद करनी चाहिए।' 

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