इस बीच शरद पवार ने कहा कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल को उन विधायकों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने का अधिकार है, जिन्होंने कल महाराष्ट्र कैबिनेट में शपथ ली थी। उन्होंने कहा, 'वहां (अजित पवार खेमा) के कई लोगों ने मुझे फोन किया और कहा कि उनकी विचारधारा राकांपा से अलग नहीं है और वे अगले कुछ दिनों में अंतिम निर्णय लेंगे।' पवार ने यह भी कहा, मेरे पास विधायकों के पार्टी छोड़ने के पुराने अनुभव हैं... भविष्य में अच्छे परिणाम आएंगे।
पार्टी की अनुशासन समिति ने उन नौ विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है, जिन्होंने सत्तारूढ़ शिवसेना-भाजपा के साथ गठबंधन करने के लिए अजित पवार की बगावत में उनका समर्थन किया था। इसने अपने एक बयान में कहा कि नौ विधायकों की ये गतिविधियां उन्हें तत्काल अयोग्य घोषित करने की मांग करती हैं... यदि उन्हें सदस्य के रूप में बने रहने की अनुमति दी जाती है, तो इस बात की बहुत वास्तविक संभावना है कि वे पार्टी के हितों को कमजोर करने की कोशिश जारी रखेंगे।
इससे पहले अजित पवार के अगले राजनीतिक कदम को लेकर हफ्तों से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए अचानक हुए घटनाक्रम से उनके चाचा शरद पवार को झटका लगा। अजित पवार को राज्यपाल रमेश बैस ने रविवार को राजभवन में उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई, जहां नौ अन्य राकांपा नेताओं ने भी भाग लिया, जिनमें से कुछ शरद पवार के करीबी सहयोगी रहे हैं।