राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (सपा) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने शुक्रवार को कहा कि उनके पिता और वरिष्ठ नेता शरद पवार ने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने से इनकार करके कई लोगों को परेशान किया है। वहीं कोल्हापुर जिले में एक कार्यक्रम में बोलते हुए, बारामती से लोकसभा सांसद ने शिवसेना में 2022 के विभाजन पर भी हल्की-फुल्की टिप्पणी की, जिसका एक गुट अब विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) में उनकी पार्टी का सहयोगी है।
शिवसेना और एनसीपी में क्यों हुआ विभाजन?
सुप्रिया सुले ने कहा कि उन्होंने कोल्हापुर जिले के हातकणंगले से शिवसेना सांसद धर्यशील माने से संसद में हल्के-फुल्के अंदाज में कहा था कि ;आपकी पार्टी इसलिए विभाजित हुई क्योंकि आपके नेता ने (संगठन और उसके कार्यकर्ताओं को) पर्याप्त समय नहीं दिया, जबकि हमारी पार्टी (राकांपा) इसलिए विभाजित हुई क्योंकि हमारे नेता ने पार्टी को बहुत समय दिया'। अपने पिता और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (सपा) के अध्यक्ष शरद पवार का जिक्र करते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि उन्होंने सक्रिय राजनीति छोड़ने से इनकार करके कई लोगों को परेशान किया है।
अजित पवार ने उम्र को लेकर साधा था निशाना
वहीं इससे पहले, एनसीपी नेता और उपमुख्यमंत्री अजि पवार ने अपने चाचा शरद पवार, जो वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं, पर उनकी उम्र को लेकर निशाना साधा था। अजित पवार ने एक बार ठाणे में पार्टी कार्यकर्ताओं की एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था 'महाराष्ट्र सरकार के कर्मचारी 58 साल की उम्र में सेवानिवृत्त हो जाते हैं। ज़्यादातर लोग आम तौर पर 75 साल की उम्र के बाद अपना सक्रिय पेशेवर जीवन छोड़ देते हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी हैं (शरद पवार का जिक्र करते हुए) जो 80 साल की उम्र पार करने और अब 84 साल के होने के बाद भी सेवानिवृत्त होने के लिए तैयार नहीं हैं'।
कैसे हुआ था शिवसेना और एनसीपी में विभाजन?
जब जून 2022 में शिवसेना विभाजित हुई, तो एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले विद्रोही गुट, जो अब भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति सरकार में उपमुख्यमंत्री हैं, ने पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे पर अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों की उपेक्षा करने और पार्टी की अनदेखी करने का आरोप लगाया। जबकि अजित पवार और उनके आठ वफादार विधायक जुलाई 2023 में महाराष्ट्र में शिवसेना-भाजपा सरकार में शामिल हो गए, जिसके कारण 1999 में शरद पवार की तरफ से स्थापित एनसीपी में विभाजन हो गया।