राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख शरद पवार ने रविवार को कहा कि अगर कोई उनकी पार्टी को तोड़ने की कोशिश की साजिश रच रहा है, तो पार्टी को कड़ी कार्रवाई करनी होगी। एनसीपी प्रमुख की यह टिप्पणी उनके भतीजे अजित पवार के अगले राजनीतिक कदम को लेकर जारी अटकलों के बीच आई है।
ऐसी चर्चा है कि अजित पवार महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से नजदीकियां बढ़ा रहे हैं। अजित पवार ने शुक्रवार को कहा था कि वह ‘100 प्रतिशत महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनना चाहेंगे’ और एनसीपी 2024 के विधानसभा चुनावों का इंतजार करने के बजाय ‘अभी भी’ मुख्यमंत्री पद पर दावा जता सकती है।
शरद पवार ने कहा, अगर कल कोई पार्टी (एनसीपी) को तोड़ने की कोशिश कर रहा है, तो यह उनकी रणनीति है। यदि हमें एक रुख अपनाना है तो हमें कड़ा रुख अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर आज बात करना उचित नहीं है, क्योंकि हमने इस पर अभी तक चर्चा नहीं की है। पवार मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित शिवसेना के 16 विधायकों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोग्य ठहराए जाने की स्थिति में एनसीपी से अजित पवार को अलग करने की अफवाह के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे।
पिछले रविवार को 'सामना' में अपने साप्ताहिक कॉलम में शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने दावा किया था कि शरद पवार ने अपनी बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे से कहा था कि कोई भी पाला बदलना नहीं चाहता, लेकिन उनके (पवार के) परिवार को निशाना बनाया जा रहा है।
राउत ने शरद पवार के हवाले से कहा था, अगर कोई एनसीपी छोड़ने का व्यक्तिगत फैसला लेता है, तो यह व्यक्तिगत मामला है, लेकिन एक पार्टी के रूप में हम कभी भी भाजपा के साथ नहीं जाएंगे। अजीत पवार ने भी इन अटकलों का खंडन किया था कि वह और उनके प्रति वफादार विधायकों का एक समूह सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन कर सकता है और कहा था कि वह जीवित रहने तक एनसीपी के साथ रहेंगे।
शरद पवार ने भारत में जीएम फसलों के परीक्षण की वकालत की
शरद पवार ने रविवार को कहा कि भारत में अनुवांशिक रूप से परिवर्तित (जेनेटिकली मॉडिफाइड या जीएम) फसलों के परीक्षण पर प्रतिबंध है, जबकि देश में ऐसी कृषि उपज के आयात पर कोई पाबंदी नहीं है। पवार ने कहा कि चूंकि, भारत में ऐसे परीक्षणों पर रोक है, इसलिए देश जीएम फसलों के संबंध में आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
महाराष्ट्र के अमरावती में एनसीपी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पवार ने कहा कि जीएम फसलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले कुछ फैसले लिए गए थे और उनके दुष्प्रभाव आज देखे जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इन्हें बदलने की जरूरत है। एनसीपी प्रमुख ने कहा, आज हमें अमेरिका के जीएम अनाज (तिलहन) के आयात पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन भारतीय किसानों को जीएम फसलें उगाने से रोका जा रहा है।
उन्होंने बाद में एक संवाददाता सम्मलेन में कहा, भारत जीएम तिलहन खरीदता है, उन्हें संसाधित करता है और फिर अपने लोगों को तेल की आपूर्ति करता है, लेकिन देश में जीएम फसलों के परीक्षण पर प्रतिबंध है। उन्होंने कहा, अगर परीक्षण नहीं किया जाएगा, तो किसानों को नई किस्म की फसलें कैसे मिलेंगी?
उन्होंने कहा कि जीएम फसलों पर केंद्र की नीति यह है कि परीक्षण लगातार तीन वर्षों तक किया जाना चाहिए और जानवरों पर भी इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होना चाहिए।पवार ने यह भी कहा कि केंद्र को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अधिक व्यावहारिक नीति अपनाने पर जोर देना चाहिए।