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हमें किनारे करके भाजपा या कांग्रेस आगे नहीं बढ़ सकती - वाघेला

Thu, 23 Nov 2017 09:04 PM IST
अतुल सिन्हा, गांधीनगर
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शंकर सिंह वाघेला
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गांधीनगर के अपने घर ‘वसंत वाग्दो’ में 77 साल के शंकर सिंह वाघेला उर्फ बापू खुद अपनी बड़ी सी गाड़ी चलाकर पहुंचते हैं। दोपहर बाद घर के बाहर बने उनके कार्यालय में थोड़ी गहमा गहमी है। बेटे महेंद्र वाघेला और बापू आगे की रणनीति बनाने में मशगूल हो जाते हैं। कांग्रेस से बाहर होने के बाद दो महीने पहले बनाई उनकी जन विकल्प पार्टी का घोषणापत्र और उम्मीदवारों के नाम तय हो रहे हैं। चुनाव के इस आखिरी वक्त में नई नई पार्टी बनाकर वाघेला कौन सा दांव चलना चाहते हैं और भाजपा या कांग्रेस से उनकी कितनी नजदीकी बची है, इसका जवाब खुद उनके समर्थक भी नहीं जानते लेकिन दबी जुबान से ये जरूर कहते हैं कि अगर बापू कांग्रेस में ही रहते तो उन्हें इस बार मुख्यमंत्री बनने से कोई नहीं रोक सकता था। ऐसे माहौल में शंकर सिंह वाघेला की रणनीति और चुनावी तैयारियों पर अतुल सिन्हा की खास बातचीत।
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सवाल – किन मजबूरियों की वजह से ठीक चुनाव से पहले आपको कांग्रेस से अलग होना पड़ा? 
जवाब – जिस पार्टी में अपने ही कार्यकर्ता खुद को सुरक्षित महसूस न करें, मारपीट की आशंका से उनका बीमा करवाना पड़े, अपने ही दफ्तरों में तोड़फोड़ करें और भाजपा की तरफ भागे, ऐसी पार्टी के साथ रहने का क्या मतलब। मैं एक साल से आलाकमान को सलाह दे रहा था, स्थितियां संभालने को कह रहा था, लेकिन नहीं हुआ। राहुल गांधी ने तो मुझे पूरा मौका दिया, खुली छूट दी, लेकिन जहां टिकट के लिए पैसे चलते हों, महिलाओं का शोषण होता हो और अराजकता का बोलबाला हो, ऐसी जगह क्या रहना। गुजरात की जनता विकल्प चाहती है, लेकिन कांग्रेस उन्हें विकल्प देने की जगह आपस में लड़ रही है। 

सवाल – क्या ये कदम उठाने में देर नहीं हो गई.. इतनी जल्दी आप उम्मीदवार कहां से लाएंगे और विकल्प कैसे देंगे? 
जवाब – हमने जितना काम किया है और जो जनाधार पहले से ही तैयार कर रखा है, इसमें हमें दिक्कत नहीं होगी। हमारे 75-80 उम्मीदवार पर्चा दाखिल कर चुके हैं। अगले चरण के लिए भी 80-85 उम्मीदवार नामांकन के लिए तैयार हैं। हमने ये तय किया है कि हम 15-20 ऐसी सीटों पर नहीं लड़ेंगे जहां भाजपा या कांग्रेस के अच्छे उम्मीदवार होंगे। जैसे विजयभाई रुपाणी या शक्ति सिंह गोहिल की सीट। फिर भी हम करीब 170 सीटों पर लड़ेंगे। 
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सवाल – आप कांग्रेस से पहले भाजपा में थे, संघ में भी रहे हैं, कांग्रेस के लोग आपको संघ का एजेंट तक कहते थे? यह भी कहा गया कि आपकी अमित शाह से मुलाकात हुई थी और आप फिर से भाजपा में लौट जाएंगे या उसे फायदा पहुंचाने के लिए काम करेंगे... 
जवाब – मैं सब जगह रहा जरूर लेकिन गलत चीजों का हमेशा विरोध करता रहा। इसलिए मुझे पहले भी अपनी पार्टी बनानी पड़ी और इस बार भी बनानी पड़ी। मैं पहले ही कह चुका हूं कि भाजपा में वापस जाने का सवाल ही नहीं है। अमित शाह से मेरी कोई मुलाकात नहीं हुई, हवाई जहाज में एक बार जरूर नमस्कार हुआ है। भाजपा और कांग्रेस के चरित्र में वैसे कोई खास अंतर नहीं है। भाजपा पहले कैडर बेस्ड पार्टी थी, अब मास बेस पार्टी बन गई है, उसका संगठन मजबूत रहा है जबकि कांग्रेस में निचले स्तर पर काम नहीं हुआ और ये एक आंदोलन करने वाली पार्टी ही रही। ऐसे में जनता को विकल्प देने के लिए ये कदम उठाना जरूरी लगा। हमारे साथ अच्छे पढ़े-लिखे लोग हैं, अलग-अलग पेशे से जुड़े हुए और गुजरात के विकास के बारे में ईमानदारी से सोचने वाले लोग हैं। 

सवाल – आपको लगता है कि आप मुख्य लड़ाई में हैं और ज्यादातर जगहों पर आपके रहने से त्रिकोणीय संघर्ष होगा? 
जवाब – मुझे तो लगता है। हमें किनारे करके भाजपा या कांग्रेस आगे नहीं बढ़ सकती। लोग जानते हैं कि बापू ने उनके लिए क्या किया है, इसलिए बिना पैसे खर्च किए हमारे साथ लोग हैं। भाजपा और कांग्रेस तो बहुत पैसे बहा रही है, लेकिन हमारे पास ईमानदार और समर्पित लोग हैं। देर जरूर हो गई है लेकिन ठीक है जब दौड़ना शुरू कर दिया तो कामयाबी मिलेगी ही। मैंने सबसे पहले 21 अक्टूबर से 10 दिनों में 6000 किलोमीटर की यात्रा की, लोगों से मिला, कैंपेन हमने तभी शुरू कर दिया। अभी मेनिफेस्टो बनाने का काम चल रहा है और 28 तारीख को नाम वापस लेने की आखिरी तारीख के बाद तस्वीर और साफ हो जाएगी। 

सवाल – क्या जीएसटी और नोटबंदी जैसे मुद्दे आप भी उठाएंगे... इसका कितना असर होगा? 
जवाब – ये मुद्दे तो हैं ही। लोग इससे काफी परेशान रहे हैं। ऊपर से गुजरात में शराबबंदी के नाम पर जितना भ्रष्टाचार है और जिस तरह मौजूदा सरकार के खिलाफ असंतोष है, विकास के नाम पर जिस तरह सिर्फ मार्केटिंग हो रही है, ये सारे मुद्दे तो हैं ही और जनता इसे समझ रही है। 
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