भारत और फ्रांस की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास 'शक्ति 2024' का 7वां एडिशन पिछले दिनों मेघालय में आयोजित किया गया। 13 से 26 मई तक चले इस सैन्य अभ्यास में दोनों देशों की सेनाओं ने हिस्सा लिया और एक्सचेंज ऑफ लॉलेज के साथ कई ऑपरेशनल ड्रिल्स को अंजाम दिया। लेकिन इस अभ्यास में सबसे ज्यादा चर्चा रही पहली भारतीय सब मशीन गन (SMG) की, जिसे मेक इन इंडिया के तहत भारत में डिजाइन और निर्मित किया गया है। फ्रांसिसी सेना भी इस घातक हथियार को देख कर चौंक गई और इस दौरान इसकी सटीकता और क्षमता का जायजा भी लिया। वहीं भारतीय सेना ने पहली बार फील्ड एरिया से आधिकारिक तौर पर इस सब मशीन गन की फोटो साझा की है।
खूबियों को निहारती दिखी फ्रेंच सेना
हाल ही में ईस्टर्न कमांड की निगरानी में मेघालय के उमरोई में भारत और फ्रांस की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास 'शक्ति 2024' का आयोजन किया गया। 13 मई से 26 मई तक चले इस संयुक्त सैन्य अभ्यास में भारतीय सेना की राजपूत रेजिमेंट और फ्रांसिसी सेना की तरफ से 13वीं विदेशी सेना हाफ ब्रिगेड (13 DBLE) के 90-90 सैनिकों ने हिस्सा लिया। वहीं इस सैन्य अभ्यास की समाप्ति के मौके पर भारतीय सेना ने हाल ही में सेना में शामिल की गई पहली भारतीय सब मशीन गन पिस्टल अस्मि (ASMI) की फोटो शेयर की, जिसमें फ्रेंच सेना इसकी खूबियों को नजदीकी से निहारती हुई दिखाई दे रही है। संभवतया यह पहला मौका है, जब भारतीय सेना ने फील्ड एरिया से 9 एमएम मशीन पिस्टल की ASMI की फोटो आधिकारिक तौर पर पब्लिक फोरम में जारी की है।
75 सालों से भारत के पास नहीं थी स्वदेशी 9 एमएम सब-मशीन
खास बात यह है कि ASMI एसएमजी को भारत में डिजाइन और निर्मित किया गया है। सैन्य सूत्र बताते हैं कि भारतीय सेना में ASMI का शामिल होना बताता है कि रक्षा हथियारों में भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ रही है। ‘अस्मी (ASMI)’ का अर्थ है कि गर्व, आत्मसम्मान। इसे खासतौर पर भारतीय सेना की स्पेशल फोर्सेज के लिए तैयार किया गया है। आतंकवाद रोधी अभियानों में यह बेहद कारगर साबित होगी। वह आगे बताते हैं कि 75 सालों से भारत के पास अभी तक स्वदेशी 9 एमएम सब-मशीन गन नहीं थी। इसे दूसरे देशों से ही आयात किया जाता था। हमारी सेना ब्रिटिश स्टेन कार्बाइन और स्टर्लिंग कार्बाइन से लेकर जर्मन हेकलर एंड कोच एमपी5 और इस्राइली UZI उजी एसएमजी पर निर्भर थी। 2005 से 2021 तक जर्मनी की सरकार ने कथित मानवाधिकार उल्लघंन के मामलों के चलते भारतीय पुलिस बलों को छोटे हथियारों की बिक्री को लेकर प्रतिबंध लगा दिया था। जर्मन सरकार ने हाल ही में छोटे हथियारों की बिक्री पर से प्रतिबंध हटाया है। इस फैसले के बाद भारतीय सुरक्षा बल एमपी5 सबमशीन गन जैसे छोटे हथियार खरीद सकेंगे। एमपी5 गनों को जर्मन कंपनी हेकलर एंड कोच बनाती है, जिनका इस्तेमाल एनएसजी और मार्कोस कमांडो भी करते हैं। इसके अलावा इसे केंद्रीय सुरक्षा बलों और राज्य पुलिस संगठनों के साथ-साथ वीआईपी सुरक्षा ड्यूटी और पुलिसिंग में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
ब्राजील और इस्राइल के हथियारों को हराया
भारतीय सेना ने हाल ही में इसी साल ही अपनी स्पेशल फोर्सेज के 550 अस्मि एसएमजी का ऑर्डर दिया है। इस हथियार का चयन बेहद कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद किया गया, जिसमें अस्मि ने ब्राजील और इस्राइल के हथियारों को हरा कर अपनी जगह बनाई। 1990 के दशक के आखिर में INSAS राइफल के ऑर्डर के बाद से भारतीय सेना द्वारा ऑर्डर किया गया यह पहला स्वदेशी छोटा हथियार है। वहीं अस्मि की कीमत विदेश से खरीदी गई एसएमजी की कीमत से एक तिहाई से भी कम है। सूत्रों का कहना है कि सेना के पास पहले से मौजूद 100,000 से अधिक पुरानी ब्रिटिश-डिजाइन वाली स्टर्लिंग कार्बाइनों को बदलने की जरूरत है और अस्मि उन जरूरतों को पूरा करेगी।
लागत मात्र 50 हजार रुपये
रक्षा मंत्रालय की तरफ से बताया गया है कि अस्मि को हैदराबाद की निजी कंपनी लोकेश मशीन लिमिटेड ने बनाया है। वहीं इसे सेना के महू स्थित इनफैंट्री स्कूल और डीआरडीओ के पुणे स्थित आयुध अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान ने डिजाइन और तैयार किया है। इसे बनाने में सबसे खास योगदान सिख रेजिमेंट के अफसर कर्नल प्रसाद बंसोड़ का है, जिन्हें कर्नल कलाश्निकोव के नाम से जाना जाता है, जो पुणे स्थित आयुध अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान में प्रतिनियुक्ति पर थे। खास बात यह है कि इस हथियार को महज चार महीने के रिकॉर्ड टाइम में तैयार किया गया है। अस्मि मशीन पिस्तौल की उत्पादन लागत 50 हजार रुपये के आसपास है, वहीं सरकार इसके निर्यात की संभावनाएं भी खोज रही है।
ये हैं ASMI की खासियतें
अस्मि 9×19 एमएम की SMG है, जिसे 9×19 एमएम पैराबेलम कारतूस दागने के लिए डिजाइन किया गया है, जो भारतीय सेना और देश भर में अन्य सुरक्षा बलों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक आम कैलिबर है। यह रिमलेस, टेपर्ड कारतूस अपनी कम कीमत और व्यापक उपलब्धता के लिए जाना जाता है। अस्मि का ऊपरी रिसीवर एयरक्राफ्ट ग्रेड एलुमिनियम से और निचला रिसीवर कार्बन फाइबर से बना है। पिस्तौल की लंबाई मुड़े हुए बट के साथ 383 मिमी, और फैले हुए बट के साथ 612 मिमी है। इसमें 33 राउंड वाली हाई कैपेसिटी मैगजीन पिस्टल ग्रिप के अंदर लोड की जाती है। अस्मी में दो बैरल कॉन्फिगरेशन हैं; 7.2-इंच (180 मिमी) और 6.5-इंच (170 मिमी) बैरल। खाली पिस्टल का वजन लगभग 2 किलोग्राम (4.4 पाउंड) है। अस्मि 600 राउंड प्रति मिनट की गति से फायर कर सकती है। इसकी मारक क्षमता 100 मीटर है, इस दूरी से यह लक्ष्य को निशाना बना सकती है।