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विकास की इबारत लिखता शाहजहांपुर: जरी-जरदोजी को मिली वैश्विक पहचान; युवाओं को रोजगार, महिलाएं हुईं आत्मनिर्भर

Sat, 21 Feb 2026 05:27 PM IST
संध्या न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

पिछले नौ वर्षों में शाहजहांपुर में मेडिकल कॉलेज, विश्वविद्यालय, गंगा एक्सप्रेसवे और औद्योगिक विकास से बदलाव आया। ओडीओपी से जरी-जरदोजी को नई पहचान मिली, रोजगार बढ़ा। विश्वकर्मा योजना, ड्रोन दीदी पहल और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं ने शिक्षा, रोजगार व जीवन स्तर को मजबूत किया।

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शाहजहांपुर का एसएस कॉलेज।
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विस्तार
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पिछले नौ साल में शाहजहांपुर में एक मेडिकल कालेज खुला है। जिले का अपना एक विश्वविद्यालय भी होने जा रहा है। सीमेंट कंपनी समेत कई औद्योगिक कारखाने हैं और जरी-जरदोजी का जो हस्तशिल्प दम तोड़ने के कगार पर पहुंच चुका था, वह अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उड़ान भर रहा है। इन सबसे ऊपर है गंगा एक्सप्रेस वे जो पूरे जिले में विकास की नई गाथा लेकर आया है। 
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जिले का विख्यात और प्राचीन स्वामी शुकदेवानंद कॉलेज अब विश्वविद्यालय के रूप में पहचाना जाएगा।  इसी कालेज से एमए करने वाली निशा कहती हैं-‘पहले हमें उच्च शिक्षा के लिए बरेली या लखनऊ जाना पड़ता था, लेकिन अब यूनिवर्सिटी बन जाने से यहीं सारी सुविधाएं मिल जाएंगी। यह यहां की बड़ी उपलब्धि है।’  

ओडीओपी योजना से यहां के कारीगरों को काफी फायदा हुआ है। इसने लगभग विलुप्त हो चुकी इस कला को दोबारा जीवित किया है। इस व्यवसाय से जुड़े मोहम्मद यासीन खान बताते हैं- ‘उनका परिवार कढ़ाई की इस कला से काफी अरसे से जुड़ा है लेकिन मांग कम होने के कारण हताश हो गए थे। लेकिन ओडीओपी के चलते हमारे इस उत्पाद की मांग न केवल देश में बल्कि दुबई और सऊदी अरब से भी बढ़ी है। पहले हमारे पास 4-5 कारीगर थे अब 50 कारीगर काम कर रहे हैं। हम लोग डिमांड नहीं पूरी कर पा रहे हैं। हमारी कमाई भी सात से आठ गुना बढ़ गई है।  
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सरफरोशी की तमन्ना रखने वाले आजादी की लड़ाई के रणबांकुरे पं. राम प्रसाद बिस्मिल के नाम पर जिले को मेडिकल कॉलेज मिला है। मेडिकल कॉलेज का इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं विश्वस्तरीय हैं। प्रिंसिपल डॉ. राजेश कुमार बताते हैं-‘100 बेड का हॉस्पिटल बनने से यहां के मरीजों को अब दूसरे जिलों में नहीं जाना पड़ता। बड़ी से बड़ी बीमारी का इलाज यहां उपलब्ध है।’ 

जिले से गंगा एक्सप्रेस वे जुड़ रहा है जो यहां के लोगों की पहुंच को आसान बना रहा है। अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री, चीनी मिल और अन्य फैक्ट्रियों में हजारों युवाओं को रोजगार मिल रहा है।  विश्वकर्मा योजना की लाभार्थी सुनीता पांडे बताती हैं-‘विश्वकर्मा योजना की वजह से ही आज मैं अपने पैरों पर खड़ी हूं और स्वावलंबी बनकर अपने परिवार का सहारा बनी हूं।’ ड्रोन दीदी के रूप में भी महिलाएं खेतों में फर्टिलाइजर का छिड़काव करके बढ़िया धनार्जन कर रही हैं।
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