सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को शाहीन बाग मामले में पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी। शीर्ष अदालत ने पिछले साल अक्तूबर में दिए शाहीन बाग फैसले को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि धरना प्रदर्शन लोग अपनी मर्जी से और किसी भी जगह नहीं कर सकते।अदालत ने कहा कि विरोध जताने के लिए धरना प्रदर्शन लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन उसकी भी एक सीमा तय है।
साल 2019 में दिल्ली का शाहीन बाग का सीएए और एनआरसी के विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में सामने आया था। यहां बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर नागरिकता कानून का विरोध किया था। कोरोना वायरस महामारी के चलते बीते साल मार्च में लगाए गए लॉकडाउन के बाद शाहीन बाग में प्रदर्शन खत्म हो गया था। प्रदर्शन में मौजूद लोग और आलोचक इस कानून को 'मुस्लिम विरोधी' बता रहे थे।