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शहाबुद्दीन की रिहाई पर बीजेपी का आरोप- लालू के दबाव में नीतीश ने तैयार किया रास्ता

Sat, 10 Sep 2016 06:19 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, बिहार
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- फोटो : ANI
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आरजेडी नेता और बिहार में आतंक का पर्याय शहाबुद्दीन के जेल से निकलते ही बिहार में राजनीति तेज हो गई है। 11 साल बाद जेल से बाहर आने वाले शहाबुद्दीन ने कहा कि नीतीश कुमार परिस्थितिवश मुख्यमंत्री हैं। मेरे नेता लालू प्रसाद यादव हैं। शहाबुद्दीन के मुख्यमंत्री को 'परिस्थितिवश सीएम' कहने के बाद नीतीश कुमार की भी प्रतिक्रिया आई हैं। बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा कि 'ये बातें मेरे लिए मायने नहीं रखती'
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मुख्यमंत्री पर शहाबुद्दीन की टिप्पणी के बाद सियासी प्रतिक्रियाएं आनी तेज हो गई हैं। बीजेपी ने सीधे नीतीश सरकार पर हमला बोल दिया है, जबकि लालू यादव की पार्टी आरजेडी बाहुबली के बयान पर कायम है। बीजेपी नेता और पूर्व सीएम सुशील मोदी ने शनिवार को ट्वीट कर कहा कि सरकार के इशारे पर शहाबुद्दीन को जमानत मिली है।
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30 विधायक पहुंचे डॉन की अगवानी को

- फोटो : Getty images File
उन्होंने कहा कि सत्ता की शह पर पुलिस और वकीलों ने शिथिलता दिखाई है। सुशील मोदी ने ट्वीट किया कि अब नीतीश के एक तरफ भ्रष्टाचार के प्रतीक लालू यादव होंगे और दूसरी तरफ शहाबुद्दीन आतंक के प्रतीक होंगे। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार मजबूरी के मुख्यमंत्री हैं और लालू के दबाव में शहाबुद्दीन के जेल से निकलने का रास्ता तैयार किया गया है। 

मोदी ने कहा कि अगर अनंत सिंह को सीसीए के तहत जेल में रखा जा सकता है, तो शहाबुद्दीन को क्यों नहीं? शहाबुद्दीन का बाहर आना आम जनता के लिए बड़ा खतरा है। मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक 11 सालों बाद जेल से रिहा हुए शहाबुद्दीन की अगवानी के लिए राजद के 30 विधायक और राज्य सरकार के चार मंत्री भी जेल के बाहर मौजूद थे।

शहाबुद्दीन के हजारों समर्थक भी जेल से बाहर उनकी रिहाई का इंतजार कर रहे थे। सीवान के इस माफिया डॉन पर हत्या, अपहरण और रंगदारी जैसे दर्जनों मामले दर्ज हैं। दिलचस्प है कि शहाबुद्दीन आरजेडी की राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य भी हैं। 
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तेजस्वी ने कहा- अदालत का फैसला

- फोटो : Getty Images
रिपोर्ट्स के मुताबिक हजारों समर्थक शहाबुद्दीन के लिए नारे लगा रहे थे। खबरों के अनुसार शहाबुद्दीन की रिहाई के मद्देनजर भागलपुर से सभी होटलों में ज्यादातर कमरे बुक थे। शहाबुद्दीन के यह समर्थक सीवान, वैशाली, बांका, पटना, दरभंगा और चंपारण से पहुंचे। 

1990 में विधायक बने शहाबुद्दीन पहली बार निर्दलीय चुने गए। फिर 1996 से 2009 तक लालू की पार्टी राजद से सांसद रहे। शहाबुद्दीन के जेल जाने के बाद उनकी पत्नी हीना ने दो बार चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों बार हार का सामना पड़ा। 

शहाबुद्दीन को जेल बाहर निकलवाने के आरोपों का सामना कर रहे डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने कहा कि यह अदालत का फैसला है। सरकार का इससे कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने कहा कि इस फैसले पर बरसने वाले लोग हाईकोर्ट की अवमानना कर रहे हैं। 
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