ओडिशा में साल 2017 की तुलना में साल 2018 में दुष्कर्म के मामलों की संख्या बढ़ी है। यह जानकारी ओडिशा विधानसभा में गृह विभाग द्वारा सदन के पटल पर रखे गए श्वेतपत्र में दी गई। इसके मुताबिक साल 2018 में रोजाना दुष्कर्म के औसतन सात मामले दर्ज किए गए। वहीं, इसी साल में हत्या के औसतन चार मामले रोज दर्ज किए गए।
इस रिपोर्ट के अनुसार साल 2018 के दौरान राज्य में हत्या के मामलों में भी वृद्धि देखी गई है। राज्य में 2,120 दंगे के मामले दर्ज किए गए। जबकि साल 2017 में यह संख्या 2,407 थी। साल 2016 में दंगों के मामलों की संख्या 1,914 थी। रिपोर्ट के अनुसार साल 2018 में डकैती के मामलों की संख्या 558 थी। राज्य में साल 2018 में सांप्रदायिक तनाव के 39 मामले सामने आए।
श्वेतपत्र में दावा किया गया है कि राज्य में साल 2018 में कोई बड़ी आतंकवादी घटना नहीं हुई। जाजपुर, ढेंकानाल, गंजम, मयूरभंज और क्योंझर समेत छह जिलों से कोई भी उग्रवादी घटना नहीं हुई। इसमें कहा गया है कि साल 2018 में 19 माओवादी मारे गए, 39 को गिरफ्तार किया गया और 27 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। इसमें दावा किया गया है कि ओडिशा में कुल मिलाकर स्थिति शांतिपूर्ण रही। हालांकि, विभिन्न कारणों से 33 बार गोलीबारी हुई।
हालांकि, विपक्षी कांग्रेस और भाजपा ने श्वेतपत्र को खारिज कर दिया है। कांग्रेस विधायक दल के नेता नरसिंह मिश्रा ने रविवार को कहा, ‘सरकार श्वेतपत्र में तथ्यों को छिपा रही है। हम इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे।’ भाजपा के मुख्य सचेतक मोहन माझी ने आरोप लगाया कि राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति खराब हो चुकी है।