नेपाल की चंपा कोठे के बाहर सीढ़ी के नीचे बैठकर दालमोट खा रही हैं। शाम के चार बज रहे हैं। उनकी आंखों में इंतजार नहीं, चिंता की झलक दिखती है। थोड़ी देर में चार युवक सीढ़ियाँ चढ़ते हैं।
चंपा झल्लाकर कहती हैं, "500 का नोट नहीं चलेगा"। दिल्ली के सबसे बड़े रेड लाइट एरिया जीबी रोड के कोठों पर पसरे सन्नाटे को आसानी से महसूस किया जा सकता है, यहाँ पाँच हजार से अधिक सेक्स वर्कर हैं। यहां की सेक्स वर्करों में काफी गुस्सा है। अल्मोड़ा की शांति तो बिना कुछ पूछे ही कह उठती हैं, "किसी तरह जिंदा हैं। हमारी पेट पर लात मारी गई है।"
शांति को जब पता चलता है कि कोई पत्रकार आया है तो वह और भड़क उठती हैं, "तुमसे बात कर मेरा क्या फायदा होगा"?
गुस्सा ठंडा होने पर शांति ने कहा, ''हमारे बारे में कौन सोचता है? रोज 700-800 रुपये कमा लेती थी। अब कस्टमर नहीं आता। 500 रुपया चल नहीं रहा है। हम उधार में भी काम नहीं कर सकते। उधार का पैसा देने कौन आएगा?'' कोठे की तीसरी मंजिल पर दड़बानुमा कमरे में एक अधेड़ औरत सो रही है, एक कोने में किरासन तेल वाले स्टोव पर लोहे की कड़ाही में थोड़ी सब्जी है। दीवार पर देवी लक्ष्मी की तस्वीर है। अजनबी आवाज सुनकर वह उठ जाती हैं। नोटबंदी से वह इस कदर गुस्से में हैं कि हमें निकल जाने को कहती हैं।