पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के सदस्यों ने जिहाद में शामिल होने से पहले सुरक्षा जाल से बचने के लिए एक लंबा घुमावदार रास्ता अपनाया था। अधिकारियों के मुताबिक, उन्होंने पहले सऊदी अरब, तुर्की जैसे देशों में शरण ली और फिर सीरिया में प्रवेश किया।
सरकार ने मंगलवार पीएफआई पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगाया है। उस पर कथित रूप से आईएसआईएस जैसे वैश्विक आतंकी संगठनों के साथ संपर्क रखने और देश में सांप्रदायिक नफरत फैलाने की कोशिश का आरोप है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा तैयार किए गए दस्तावेजों के मुताबिक, कुछ ऐसे मामले थे जिनमें विदेशी धरती पर युवकों को मारा गया या गिरफ्तार किया गया। बाद में उन्हें भारत डिपोर्ट किया गया था।
केरल पुलिस को 2017 में सूचना मिली थी कि कुछ मुस्लिम युवक सीरिया चले गए हैं और कुछ आईएसआईएस से हाथ मिलाने की योजना बना रहे हैं। मामले के अधिकांश आरोपी पीएफआई के सदस्य थे।
अधिकारियों ने कहा कि खाड़ी से लौटा हमजा केरल के युवकों को आईएसआईएस में भर्ती करने का मास्टरमाइंड था। हमजा ने अपनी योजनाओं को अंजाम देने के लिए पीएफआई के उन समर्थकों से दोस्ती की जो पहले से ही राष्ट्र विरोधी या सत्ता विरोधी भावनाओं को पैदा कर रहे थे।
पीएफआई के संभागीय अध्यक्ष मोहम्मद समीर उर्फ अबू सफवान ने कथित तौर पर भारत से निकलने की योजना बनाई और आईएसआईएस में शामिल होने के लिए कई देशों में शरण लेने के बाद सीरिया में प्रवेश किया। अधिकारियों ने कहा कि इस प्रक्रिया में आरोपी सऊदी अरब, मलेशिया और तुर्की गया और उसने सीरिया में जिहाद में शामिल होने के लिए आखिर तक इंतजार किया।
बाद में जिहाद में भाग लेने के दौरान दोनों पीएफआई नेता अब्दुल मनाफ उर्फ अबू फातिमांद, मोहम्मद समीर उर्फ सफवान सीरिया में मारे गए। जांच आगे बढ़ने पर मास्टरमाइंड समेत पांच लोगों को केरल की पुलिस ने आईएसआईएस में शामिल होने से पहले ही गिरफ्तार किया।
केरल पुलिस ने आईएसआईएस का समर्थन करने वाले 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इस मामले में कथित मास्टरमाइंड हमजा एक कट्टर सलाफी समर्थक था जो आईएसआईएस और तालिबान के समर्थन में प्रचार करता था।