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सुप्रीम कोर्ट: दिल्ली एसआईआर पर 21 सितंबर को सुनवाई, मतदाता सूची से 47 लाख नाम हटाए जाने के खिलाफ हुई है अपील

Thu, 17 Sep 2026 10:42 PM IST
प्रशांत तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला
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सुप्रीम कोर्ट अपडेट - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर 21 सितंबर को सुनवाई करने पर सहमति जताई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि मामले की सुनवाई सोमवार को होगी, क्योंकि एसआईआर से जुड़े अन्य मामले भी अगले सप्ताह सूचीबद्ध हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दावा किया कि दिल्ली में करीब 47 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिनमें से 33 लाख लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने नोटिस पाने वालों के नाम और नाम हटाने के आधार सार्वजनिक नहीं किए हैं।

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मसौदा सूची से हटाए गए  47 लाख नाम
चुनाव आयोग ने 31 अगस्त को एसआईआर के तहत दिल्ली की मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की थी। इसमें कुल करीब 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 47 लाख नाम हटाए गए। आयोग के अनुसार, इनमें 43.32 लाख से अधिक मतदाता ऐसे पाए गए जो स्थानांतरित हो चुके थे या अपने पते पर अनुपस्थित थे, जबकि करीब 2.82 लाख मतदाता मृत पाए गए और 1.41 लाख से अधिक मतदाता एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत थे।

दारा सिंह की सजा कम करने की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
1999 में ओडिशा के क्योंझर में ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टुअर्ट स्टेन्स और उनके दो नाबालिग बेटों की हत्या के मामले में दोषी दारा सिंह की सजा कम करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। मामले में दारा सिंह को दोषी ठहराया गया था और उसे दी गई सजा को लेकर लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया चलती रही है। अब शीर्ष अदालत के समक्ष उसकी ओर से सजा में कमी किए जाने की मांग वाली अर्जी पर सुनवाई होनी है। यह मामला देश में धार्मिक हिंसा और अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामलों में लंबे समय से चर्चा में रहा है।

I-PAC दफ्तर पर ED की कार्रवाई 
सुप्रीम कोर्ट प्रवर्तन निदेशालय (ED) की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें 8 जनवरी को कोलकाता स्थित पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के कार्यालय में तलाशी के दौरान कथित तौर पर अधिकारियों के काम में रुकावट डालने का आरोप लगाया गया है। ED का आरोप है कि तलाशी की कार्रवाई के दौरान तत्कालीन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के कुछ अन्य अधिकारियों ने जांच में हस्तक्षेप किया। एजेंसी ने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान तलाशी की कार्रवाई, अधिकारियों के कथित हस्तक्षेप और जांच एजेंसी के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर विचार किया जा सकता है।

शिवसेना नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट उद्धव ठाकरे गुट की उन याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, जिनमें चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत एकनाथ शिंदे गुट को वास्तविक शिवसेना माना गया था। चुनाव आयोग ने शिंदे गुट के पक्ष में फैसला देते हुए पार्टी का नाम ‘शिवसेना’ और चुनाव चिह्न ‘धनुष-बाण’ उसे आवंटित किया था। उद्धव ठाकरे गुट ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। अब शीर्ष अदालत में इन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग के फैसले और उससे जुड़े कानूनी पहलुओं पर बहस होगी।

कुछ विदेशी मेडिकल स्नातकों को क्यों नहीं दिया जा रहा वजीफा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) से पूछा कि कुछ मेडिकल कॉलेजों में विदेशी मेडिकल स्नातकों को वजीफा क्यों नहीं दिया जा रहा है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने एनएमसी को इस संबंध में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

अदालत ने राजस्थान सरकार को भी विदेशी मेडिकल स्नातकों को दो सप्ताह के भीतर वजीफा देने का निर्देश दिया। पीठ ने चेतावनी दी कि आदेश का पालन नहीं होने पर राज्य के सचिव को अदालत में बुलाया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी। याचिकाकर्ताओं की वकील तन्वी दुबे ने अदालत में एक सूची पेश की और बताया कि कुछ कॉलेज विदेशी मेडिकल स्नातकों को कोई वजीफा नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि एनएमसी के एक परिपत्र में भारतीय और विदेशी मेडिकल स्नातकों के वजीफे में समानता की बात कही गई है। इसके बावजूद कई राज्यों में दोनों को समान काम और समान घंटे काम करने के बावजूद बराबर वजीफा नहीं मिलता।
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अम्रपाली के पूर्व निदेशकों की संपत्तियां अटैच करने को प्राथमिकता दे ईडी: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को निर्देश दिया कि वह अम्रपाली समूह के पूर्व निदेशकों और प्रवर्तकों की संपत्तियां अटैच कर घर खरीदारों की रकम जल्द से जल्द वसूलने को प्राथमिकता दे। जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा व जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि छह साल में सिर्फ 283.7 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की गई हैं, जबकि घर खरीदारों से जुड़ी करीब 5,619 करोड़ रुपये की रकम मामले में शामिल है।

पीठ ने कहा कि 2019 के आदेश के बावजूद कार्रवाई की गति पर्याप्त नहीं है। 46,000 से अधिक घर खरीदार प्रभावित हैं। अदालत ने संबंधित पीएमएलए अदालतों को कुर्क संपत्तियों की बिक्री पर जल्द फैसला लेने, संभव हो तो रोजाना सुनवाई करने को कहा। ईडी को अगली सुनवाई तक पूर्व निदेशकों, प्रवर्तकों और सीएफओ की संपत्तियों के संबंध में कार्रवाई की ताजा स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया। घर खरीदारों की ओर से बताया गया कि फोरेंसिक ऑडिट के अनुसार 5,619.47 करोड़ रुपये में से सिर्फ 744.81 करोड़ रुपये की वसूली हुई है। 2,159 करोड़ रुपये से अधिक राशि अम्रपाली के प्रवर्तकों और निदेशकों से व 1,200 करोड़ रुपये से अधिक संबंधित तीसरे पक्षों से वसूलना बाकी है। एनबीसीसी की ओर से 33,250 फ्लैट बनाए गए हैं, लेकिन 22,350 खरीदारों को ही कब्जा मिला है। मामले की अगली सुनवाई 26 अक्तूबर को होगी।
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