सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामलों में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के खिलाफ सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) की याचिकाओं का निपटारा कर दिया। यह फैसला SEBI की ओर से NSE के साथ करीब ₹1,500 करोड़ के सेटलमेंट को मंजूरी दिए जाने के बाद आया है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और के. विनोद चंद्रन की पीठ ने प्रस्तावित सेटलमेंट पर गौर करने के बाद याचिकाओं का निपटारा किया। ये मामले उन आरोपों से जुड़े थे, जिनमें कुछ स्टॉकब्रोकरों को अन्य निवेशकों से पहले मार्केट डेटा हासिल करने और ट्रेड करने के लिए अनुचित बढ़त मिलने की बात कही गई थी।
NSE ने पूरी की ₹1,491.21 करोड़ की सेटलमेंट राशि
जुलाई में NSE ने SEBI से ₹1,491.21 करोड़ में लंबे समय से लंबित को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामलों को निपटाने की सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद रेगुलेटर को ₹714.74 करोड़ का भुगतान किया था। NSE पहले ही ₹776.47 करोड़ जमा कर चुका था। इस तरह दोनों भुगतानों को मिलाकर संशोधित सेटलमेंट शर्तों के तहत तय ₹1,491.21 करोड़ की पूरी राशि का भुगतान हो गया। NSE ने शुरुआत में 20 जून, 2025 को SEBI के पास दो सेटलमेंट आवेदन दाखिल किए थे, जिनमें कुल ₹1,387.39 करोड़ की राशि शामिल थी। बाद में 13 मार्च, 2026 को सेटलमेंट की शर्तों में बदलाव करते हुए कुल राशि बढ़ाकर ₹1,491.21 करोड़ कर दी गई।
₹30,000 करोड़ के IPO की तैयारी में NSE
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) की तैयारी कर रहा है। जून में NSE ने IPO के लिए SEBI के पास ड्राफ्ट पेपर जमा किए थे। प्रस्तावित IPO में मौजूदा शेयरधारकों की ओर से 14.89 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल है, जो एक्सचेंज की कुल इक्विटी पूंजी का करीब 6 प्रतिशत है। सूत्रों के मुताबिक, IPO में कोई नया इश्यू (Fresh Issue) नहीं होगा और इसकी अनुमानित वैल्यू करीब ₹30,000 करोड़ हो सकती है। ऐसा होने पर यह भारतीय कैपिटल मार्केट के सबसे बड़े पब्लिक इश्यू में शामिल हो सकता है।