डकैती, धोखाधड़ी, हत्या की कोशिश के मामले में सात साल तक कैद की सजा का प्रावधान है। इन अपराधों की सूची में गंगा को नुकसान पहुंचाने का जुर्म भी शामिल हो जाएगा। गंगा को इंसान की तरह जीवित हस्ती का दर्जा मिलने के बाद इसके साथ किसी तरह के दुर्व्यवहार पर सात साल तक कैद की सजा हो सकती है।
केंद्र सरकार की समिति द्वारा तैयार गंगा रीजुविनेशन, प्रोटेक्शन एंड मैनेजमेंट बिल के कानून बन जाने के बाद गंगा से छेड़छाड़ करने वालों को 7 साल की सजा और 100 करोड़ तक जुर्माना हो सकता है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में गंगा नदी को जीवित हस्ती का दर्जा दिया था।
समिति ने बिल के प्रारूप में स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई व्यक्ति इस नियम की अनदेखी करता है तो उसके लिए बहुत महंगा पड़ेगा। गंगा से छेड़छाड़ में उसके प्रवाह को रोकना, उसके तटों पर उत्खनन या बिना अनुमति घाट बनाना शामिल हैं।