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जीवनदायिनी हैं ये जड़ी-बूटियां, एक का इस्तेमाल तो कोरोना में भी हो रहा

Wed, 08 Apr 2020 01:06 PM IST
Tanuja Yadav तनुजा यादव, अमर उजाला, नई दिल्ली
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रोग प्रतिरोधक बढ़ाने में मददगार जड़ी-बूटी - फोटो : social media
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इंसान हजारों सालों से किसी भी बीमारी के इलाज के लिए पेड़-पौधों या संजीवनी बूटी माने जाने वाले पौधों का इस्तेमाल करता आ रहा है। आयुर्वेद में जड़ी-बूटियों को दवाई के रुप में इस्तेमाल करने का उल्लेख मिलता है। अभी तक कोरोना को खत्म करने के लिए किसी दवाई का ईजाद नहीं हुआ है लेकिन कोरोना से लड़ने के लिए शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। जिन जड़ी बूटियों को जीवनदायिनी कहा गया है उनमें से एक कोरोना को खत्म करने के लिए भी इस्तेमाल में लाई जा रही है। आइए जानते हैं कि ऐसे कौन से सात पौधे या जड़ी बूटी हैं जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करेंगे।
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सिनकोना पौधा जिसकी छाल से बनती है कुनैन

सिनकोना पौधा - फोटो : social media
कुनैन 
सिनकोना पौधे की छाल का इस्तेमाल कर कुनैन औषधि बनाई जाती है जिसका इस्तेमाल मलेरिया, ज्वर और सूजन को खत्म करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा हाल ही में ज्यादा मांग की जा रही हाइड्रॉक्लीक्लोरोक्वीन दवा बनाने में भी कुनैन का इस्तेमाल किया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कुछ उपयोदी दवाओं को मिलाकर एक सूची तैयार की है इसमें कुनैन को भी जगह दी गई है। कुनैन स्वाद में कड़वा होता है।

काउस्लिप पौधा

काउस्लिप पौधा - फोटो : social media
काउस्लिप फूल
घंटियों के आकार वाले ये पीले काउस्लिप फूल देखने में काफी आकर्षित और खूबसुरत लगते हैं। लेकिन ये फूल केवल आकर्षित ही नहीं बल्कि काफी गुणकारी भी हैं। ये फूल यूरोप और पश्चिमी यूरोप में ज्यादा पाए जाते हैं। सामान्य तौर पर इसका इस्तेमाल अस्थमा और ब्रोकाइटिस जैसी बीमारियों में फायदा पहुंचाता है। इसके अलावा पेट दर्द, लकवा, सिर दर्द, साइनस, खांसी और फ्लू को ठीक करने में मदद करता है। अगर स्किन और किडनी संबंधी कोई बीमारी है तो इस फूल का इस्तेमाल किया जा सकता है।

गुआराना की बेल

गुआराना की बेल - फोटो : social media
गुआराना की बेल
गुआराना की बेल की बेल ब्राजील के अमेजन के इलाके में पाई जाती है। इस बेल से एक तरह के पेय पदार्थ को तैयार किया जाता है जिसे लोग शौक से पीते हैं। बेल पर लगने वाली छोटी छोटी लाल बेरियों में कैफिन पाया जाता है जो पेट से जुड़ी कई समस्याओं से निपटारा पाने में मदद करता है। इसके अलावा वजन कम करने और नर्वस सिस्टम को बेहतर बनाने में गुआराना की बेल की इस्तेमाल किया जाता है।

अफ्रीकी चेरी

अफ्रीकी चेरी - फोटो : social media
अफ्रीकी चेरी की छाल
अफ्रीकी चेरी की छाल को बहुत गुणकारी माना जाता है। केन्या में पारंपरिक इलाज में इस छाल का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इस छाल का प्रयोग मलेरिया और पेट से संबंधित बीमारियों को खत्म करने के लिए किया जाता है। लेकिन प्रोस्टेट कैंसर में राहत के लिए अफ्रीकी चेरी की छाल को ज्यादा उपयोगी माना गया है।

जिनसेंग

जिनसेंग - फोटो : social media
जिनसेंग
एशिया और उत्तरी अमेरिका में कई बीमारियों से निपटने के लिए जिनसेंग के पौधे को इस्तेमाल में लाया जाता है। जिनसेंग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। ये स्वाद में कड़वा और मसालेदार होता है। जिनसेंग का फायदा शरीर की कमजोरी को दूर करने के लिए भी किया जाता है। इसके अलावा कैंसर, सूजन, मासिक धर्म, त्वचा संबंधी समस्याओं, तनाव और मधुमेह जैसी बीमारियों से निपटने में कारगार साबित होता है।

वेटीवर घास (खस)

वेटीवर घास (खस) - फोटो : social media
वेटीवर घास (खस)
वेटीवर घास भारत में पाई जाती है, इसे खस के नाम से जाना जाता है और इसका उपयोग दवाइयां में बनाने में किया जाता है। वेटीवर घास में एक एंटीसेप्टिक तत्व पाया जाता है जिसकी वजह से इसका उपयोग क्रीम और साबून बनाने में होता है। धरती के कटाव को रोकने के लिए भी खस का प्रयोग किया जाता है। इस घास की मदद से थैला और चटाई बनाने में मदद मिलती है। इसी के साथ वेटीवर घास जानवरों को भी खिलाई जा सकती है। दिल से संबंधित बीमारी, बुखार, धातुदोष, सिरदर्द, सांस के रोग और मांसपेशियों में ऐंठन में मददगार होती है ये घास।
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डैंडेलायन - फोटो : social media
डैंडेलायन
हाजमे की प्रक्रिया को और बेहतर करने के लिए इस पौधे का इस्तेमाल किया जाता है। यह पौधा खनिज और प्रोटीन से भरपूर होता है जिसका इस्तेमाल सामान्य तौर पर इंसान के शरीर से अवांछित तरल पदार्थों को खत्म करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा गॉल ब्लेडर और लीवर के लिए भी इसे अच्छा माना जाता है।
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