कुनैन
सिनकोना पौधे की छाल का इस्तेमाल कर कुनैन औषधि बनाई जाती है जिसका इस्तेमाल मलेरिया, ज्वर और सूजन को खत्म करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा हाल ही में ज्यादा मांग की जा रही हाइड्रॉक्लीक्लोरोक्वीन दवा बनाने में भी कुनैन का इस्तेमाल किया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कुछ उपयोदी दवाओं को मिलाकर एक सूची तैयार की है इसमें कुनैन को भी जगह दी गई है। कुनैन स्वाद में कड़वा होता है।
काउस्लिप फूल
घंटियों के आकार वाले ये पीले काउस्लिप फूल देखने में काफी आकर्षित और खूबसुरत लगते हैं। लेकिन ये फूल केवल आकर्षित ही नहीं बल्कि काफी गुणकारी भी हैं। ये फूल यूरोप और पश्चिमी यूरोप में ज्यादा पाए जाते हैं। सामान्य तौर पर इसका इस्तेमाल अस्थमा और ब्रोकाइटिस जैसी बीमारियों में फायदा पहुंचाता है। इसके अलावा पेट दर्द, लकवा, सिर दर्द, साइनस, खांसी और फ्लू को ठीक करने में मदद करता है। अगर स्किन और किडनी संबंधी कोई बीमारी है तो इस फूल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
गुआराना की बेल
गुआराना की बेल की बेल ब्राजील के अमेजन के इलाके में पाई जाती है। इस बेल से एक तरह के पेय पदार्थ को तैयार किया जाता है जिसे लोग शौक से पीते हैं। बेल पर लगने वाली छोटी छोटी लाल बेरियों में कैफिन पाया जाता है जो पेट से जुड़ी कई समस्याओं से निपटारा पाने में मदद करता है। इसके अलावा वजन कम करने और नर्वस सिस्टम को बेहतर बनाने में गुआराना की बेल की इस्तेमाल किया जाता है।
अफ्रीकी चेरी की छाल
अफ्रीकी चेरी की छाल को बहुत गुणकारी माना जाता है। केन्या में पारंपरिक इलाज में इस छाल का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इस छाल का प्रयोग मलेरिया और पेट से संबंधित बीमारियों को खत्म करने के लिए किया जाता है। लेकिन प्रोस्टेट कैंसर में राहत के लिए अफ्रीकी चेरी की छाल को ज्यादा उपयोगी माना गया है।
जिनसेंग
एशिया और उत्तरी अमेरिका में कई बीमारियों से निपटने के लिए जिनसेंग के पौधे को इस्तेमाल में लाया जाता है। जिनसेंग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। ये स्वाद में कड़वा और मसालेदार होता है। जिनसेंग का फायदा शरीर की कमजोरी को दूर करने के लिए भी किया जाता है। इसके अलावा कैंसर, सूजन, मासिक धर्म, त्वचा संबंधी समस्याओं, तनाव और मधुमेह जैसी बीमारियों से निपटने में कारगार साबित होता है।
वेटीवर घास (खस)
वेटीवर घास भारत में पाई जाती है, इसे खस के नाम से जाना जाता है और इसका उपयोग दवाइयां में बनाने में किया जाता है। वेटीवर घास में एक एंटीसेप्टिक तत्व पाया जाता है जिसकी वजह से इसका उपयोग क्रीम और साबून बनाने में होता है। धरती के कटाव को रोकने के लिए भी खस का प्रयोग किया जाता है। इस घास की मदद से थैला और चटाई बनाने में मदद मिलती है। इसी के साथ वेटीवर घास जानवरों को भी खिलाई जा सकती है। दिल से संबंधित बीमारी, बुखार, धातुदोष, सिरदर्द, सांस के रोग और मांसपेशियों में ऐंठन में मददगार होती है ये घास।
डैंडेलायन
हाजमे की प्रक्रिया को और बेहतर करने के लिए इस पौधे का इस्तेमाल किया जाता है। यह पौधा खनिज और प्रोटीन से भरपूर होता है जिसका इस्तेमाल सामान्य तौर पर इंसान के शरीर से अवांछित तरल पदार्थों को खत्म करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा गॉल ब्लेडर और लीवर के लिए भी इसे अच्छा माना जाता है।