ओडिशा के दक्षिणी हिस्से में मौजूद कालाहांडी स्थित कारलापट वन्यजीव अभ्यारण्य में सात हाथियों की मौत एक बैक्टीरिया पास्चुरेला मल्टोसीडा की वजह से हुई है। प्रोजेक्ट एलीफेंट डिविजन के एक केंद्रीय जांच दल ने अपनी जांच में बताया कि इस बैक्टीरिया से हाथियों को हैमरेजिक सेप्टिसीमिया हुआ था। इसे साधारण भाषा में गलाघोंटू रोग कहा जाता है, जिसमें बड़े आकार के पशु के सिर व गले में सूजन आती है।
केंद्रीय जांच दल का दावा संक्रमण की वजह से गलाघोंटू हुआ था, पुष्टि के लिए आईवीआरआई भेजी रिपोर्ट
जांच अधिकारियों ने मारे गए छह हाथियों और एक गाय के नमूने ओडीशा पशुचिकित्सा कॉलेज से लिए थे। दावे की पुष्टि के लिए आईवीआरआई बरेली को भी नमूने भेजे हैं। इस रोग को और फैलने से रोकने के लिए जिलाधिकारी व पशुचिकित्सा अधिकारियों के साथ बैठक रखी गई।
हाथियों के मरने का सिलसिला 1 फरवरी से शुरू हुआ था, जिसके बाद 14 दिन में सात हाथी मारे गए। सभी मृत हाथी मादा थे या कुछ माह पूर्व ही जन्म बच्चे। आशंका है कि वे गर्भावस्था के दौरान संक्रमित हुए। पूर्व में भी राज्य के चिकित्सा अधिकारियों ने गलाघोंटू की आशंका जताई थी।
पालतू मवेशियों से हाथियों में संक्रमण
आशंका जताई जा रही है कि हाथियों को गलाघोंटू संक्रमण पालतू मवेशियों से हुआ जो अभ्यारण्य में दाखिल हो रहे हैं। केंद्रीय जांच दल ने सभी मवेशियों के टीकाकरण की सिफारिश की है। 175 वर्ग किमी आकार के अभ्यारण्य में 80 वनरक्षकों द्वारा हाथियों के मूवमेंट पर भी नजर रखी जा रही है ताकि वे मवेशियों के संपर्क में न आएं। विशेषज्ञों के अनुसार संक्रमित मवेशी द्वारा छोडे़ गए चारे, पानी, उनकी लार व श्वास से भी हाथियों को गलाघोंटू हो सकता है। ऐसे में हाथियों के लिए खतरा बना हुआ है।