तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी
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तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी के ‘सेवाश्रय’ को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को सख्त रुख अपनाया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपोब्रत चक्रवर्ती की अध्यक्षता वाली पीठ ने दक्षिण 24 परगना के फल्ता में सेवाश्रय के लिए बनाए गए अस्थायी निर्माण हटाने का निर्देश दिया। अदालत ने टिप्पणी की, “अस्थायी निर्माण हटा दें। पुलिस को बुलाऊं. या राज्य पुलिस को हटाने के लिए कहेगा।
खेल मैदान पर निर्माण का आरोप
फल्ता निवासी अधिवक्ता अमीनुद्दीन खान ने याचिका दायर कर सेवाश्रय के लिए बनाए गए दो अस्थायी ढांचे हटाने की मांग की थी। उनका आरोप है कि फल्ता बीडीओ कार्यालय के पास स्थित खेल मैदान और उद्यान की जमीन पर इनका निर्माण किया गया। याचिकाकर्ता के मुताबिक, मैदान में स्कूलों के खेल, क्रिकेट और फुटबाल प्रतियोगिताएं तथा सरकारी और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होते थे। निर्माण के कारण इन गतिविधियों पर असर पड़ा।
काम बंद, ढांचे अब भी मौजूद
अभिषेक बनर्जी ने पिछले वर्ष अपने लोकसभा क्षेत्र डायमंड हार्बर के लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सेवाश्रय शुरू किया था। विधानसभा चुनाव से पहले इसके लिए कई अस्थायी निर्माण किए गए थे। याचिकाकर्ता का दावा है कि फल्ता में सेवाश्रय का सबसे बड़ा केंद्र बनाया गया और इस पर करीब पांच करोड़ रुपये खर्च हुए। अब सेवाश्रय का काम बंद है, लेकिन अस्थायी ढांचे अभी भी मौजूद हैं।
क्यों अहम है आदेश?
हाईकोर्ट का निर्देश ऐसे समय आया है जब अभिषेक बनर्जी से जुड़े कई मामले अदालत में चल रहे हैं। हालांकि, इस मामले में अदालत का आदेश विशेष रूप से फल्ता में सेवाश्रय के अस्थायी निर्माण को हटाने से संबंधित है।