सीरम इंस्टीट्यूट ने अपना वादा निभाते हुए जून में अब तक कोविशील्ड की 10 करोड़ खुराक का उत्पादन कर लिया है। देश में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए सरकार ने टीकाकरण अभियान को तेज कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने 21 जून से 18 वर्ष के ऊपर के सभी लोगों का टीकाकरण करने का फैसला लिया है। इसके तहत पिछले छह दिनों में रोजाना औसत 69 लाख लोगों को टीका लगाया जा रहा है।
रविवार को जारी आंकड़े के मुताबिक देश में अब तक 32.17 करोड़ लोगाें को टीका लगाया जा चुका है। सरकार की ओर से फर्म के निदेशक प्रकाश कुमार सिंह ने मई में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को बताया था कि कोविशील्ड का उत्पादन बढ़ा कर जून में 10 करोड़ किया जाएगा।
कोविशील्ड की पहली डोज डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ 61 फीसदी प्रभावी
डॉ. एन के अरोरा केंद्र सरकार की ओर से बनाए गए कोविड वर्किंग ग्रुप के चेयरपर्सन हैं। उन्होंने बताया कि वैक्सीन की दोनों खुराकों के बीच जो 12 से 16 हफ्तों का गैप बढ़ाया गया है वो देश में किए गए ट्रायल के हिसाब सही है। डॉ. अरोरा के मुताबिक आंकड़ों के हिसाब से देखा गया है कि डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ कोविशील्ड की पहली डोज 61 फीसदी प्रभावी है।
एक न्यूज चैनल से बातचीत में डॉ. अरोरा ने कहा कि जब सरकार ने टीककरण कार्यक्रम की शुरुआत की थी उस वक्त दोनों खुराकों के बीच का गैप चार हफ्तों का था। वो भी ट्रायल के नतीजों के हिसाब से तय किया गया था, हमें पता चला था कि चार हफ्तों के अंतराल में इम्युन रिस्पॉन्स काफी अच्छा है।
हालांकि, उस वक्त ब्रिटेन ने पहले ही इस गैप को बढ़ाकर 12 हफ्तों का कर दिया था। ये वो समय था जब यूके अल्फा वेरिएंट से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा था। दिसंबर- जनवरी उनके लिए काफी कठिन वक्त रहा है।
आगे डॉ. अरोरा ने बताया कि डेट के रिव्यू करने के बाद ही खुराकों के बीच अंतराल बढ़ाया गया। पहले चार हफ्ते के अंतराल पर ही काम कर रहे थे। लेकिन डब्ल्यूएचओ ने दिए सुझावों के बाद ही छह से आठ हफ्ते का अंतराल बढ़ाया गया।