देश में कितने लोगों में एंटीबॉडीज बनी है, इसकी जांच के लिए एक बार फिर सीरो सर्वे कराजा जाएगा। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की निगरानी में चेन्नई स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी (एनआईई) 70 जिलों में यह सर्वे करेगा, जिसमें करीब 30,000 लोगों को शामिल किया जाएगा। देश में अब तक दो बार सीरो सर्वे हो चुका है।
आईसीएमआर के मुताबिक, सभी राज्यों से सैंपल लेने और जांच के बाद ऑनलाइन पोर्टल से डाटा भेजा जाएगा। एनआईई इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगा। आईसीएमआर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस बार संक्रमण की स्थिति का पता लगाने के लिए आम जनता के साथ स्वास्थ्य कर्मचारियों को भी सर्वे में शामिल किया जाएगा।
इसका मकसद यह पता करना है कि वे वायरस से कितने प्रभावित हुए हैं। सर्वे की शुरुआत इसी सप्ताह होगी, जो जनवरी के पहले सप्ताह में पूरा हो जाएगा। इससे पहले हुए दो सर्वे में भी करीब 30,000 हजार लोग ही शामिल हुए थे।
टीकाकरण से पहले सामने होंगे नतीजे
आईसीएमआर के डॉ. समीरन पांडा ने बताया कि टीकाकरण से पहले सर्वे के परिणाम सरकार के साथ साझा किए जाएंगे। इसके आधार पर यह पता चलेगा कि ग्रामीण और शहरी स्तर पर कोरोना का प्रसार कितना हो चुका है। पहला सीरो सर्वे में मई में हुआ था, जब लॉकडाउन था।
उस दौरान एक फीसदी से भी कम लोगों के संक्रमित होने का पता चला। 17 अगस्त से 22 सिंतबर के बीच हुए दूसरे सर्वे में करीब सात फीसदी लोगों में एंटीबॉडीज पाई गई थीं।
संक्रमितों को टीके की जरूरत है या नहीं
एनआईई के निदेशक डॉ. मनोज का कहना है कि इस सर्वे का मकसद टीकाकरण से पहले यह पता करना है कि संक्रमितों को टीके की जरूरत है या नहीं। साथ ही टीकाकरण से पहले एंटीबॉडीज के स्तर का अनुमान लगाया जा सके।
उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले तक चर्चा चल रही थी कि टीके से पहले लोगों की जांच हो ताकि पता चले कि उनके शरीर में एंटीबॉडीज का स्तर कितना है? हालांकि, अभी इस पर फैसला नहीं हुआ है, लेकिन सरकार इसके लिए इनकार भी कर सकती है।