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बापू की जीवनी पर आयोजित परीक्षा में सीरियल ब्लास्ट के आरोपी बने टॉपर

Sat, 10 Dec 2016 01:15 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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फाइल फोटोः राष्ट्रपिता महात्मा गांधी
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साबरमती सेंट्रल जेल में बंद 2008 सीरियल ब्लास्ट के एक आरोपी ने नवजीन ट्रस्ट की ओर से महात्मा गांधी के जीवन पर आयोजित परीक्षा में प्रथम स्थान हासिल किया है। पब्लिकेशन हाउस के रूप में नवजीवन ट्रस्ट की स्थापना राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने की थी। 
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प्रतिबंधित स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया के बाद इंडियन मुजाहिद्दीन बनाने वाले और आतंकी हमलों के कथित मास्टर माइंड सफदर नागौरी और एक अन्य दूसरे आरोपी अयाज सैयद ने परीक्षा में पहला पुरस्कार साझा किया। दोनों आरोपियों ने 80 में से 76 अंक हासिल किए और संयुक्त रूप से पहला स्थान प्राप्त किया। 

महात्मा गांधी की संक्षिप्त जीवनी पर आधारित तीन स्तरीय परीक्षा का रिजल्ट गुरुवार को घोषित किया गया। नवजीवन ट्रस्ट ने कैदियों के लिए इस परीक्षा का आयोजन किया। इसमें कक्षा सात तक पढ़े कैदियों के लिए 'गांधी बापू' प्राथमिक परीक्षा का आयोजन किया गया। इसके अलावा दसवीं तक पढ़े कैदियों से 'मेरी जीवन कथा' पर आधारित परीक्षा ली गई। वहीं, जिन कैदियों ने हायर सेकेंडरी से ज्यादा की पढ़ाई की थी उन्हें गांधी की जीवनी पर आधारित परीक्षा में बैठना था। 
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दिलचस्प रूप से गांधी की संक्षिप्त जीवनी पर आधारित परीक्षा में पहले तीन स्थानों पर सीरियल ब्लास्ट के आरोपियों रहे, जोकि जेल की '200 खोली' में साथ रह रहे हैं।

दूसरा स्थान प्राप्त करने वाले सज्जाद मंसूरी और नागौरी 2013 में जेल से भागने के लिए 213 फुट लंबी टनल खोदने के आरोपी 24 लोगों में भी शामिल हैं। 

 
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25 हजार रुपये का पुरस्कार

कैश प्राइज में मिले 25 हजार रुपयों को नागौरी ने कैदी वेलफेयर फंड में जमा करा दिया। वहीं दूसरे स्तर की परीक्षा 'मेरी जीवनकथा' में पहला स्थान एक और सीरियल ब्लास्ट के आरोपी शम्सुद्दीन शेख ने प्राप्त किया। शेख को भी 25,000 रुपये का पुरस्कार मिला। 

वहीं, छारा समुदाय के करोड़ों रुपयों की ठगी करने वाले कैदी अशोक जडेजा उर्फ जय मादी ने भी तीसरे स्तर की परीक्षा 'गांधी बापू' के टॉपरों की लिस्ट में जगह बनाई। जडेजा ने तीसरा स्थान हासिल किया और उसे 5000 रुपये का पुरस्कार मिला। 

नवजीवन ट्रस्ट की ओर से आयोजित परीक्षा में 363 कैदियों ने हिस्सा लिया। नवजीवन के मैनेजिंग ट्रस्टी विवेक देसाई ने कहा कि कैदियों से मिला अनुभव काफी कुछ सिखाने वाला रहा। 

उन्होंने कहा कि यह बहुत बढ़िया है कि जेल स्टाफ ने अगले राउंड के टेस्ट के लिए भी निवेदन किया है। अगर हमें अनुमति मिलती है, तो हम पुलिसकर्मियों के लिए भी अलग श्रेणी शुरू करेंगे, जिसमें अलग से पुरस्कार भी होगा। हमारा लक्ष्य गांधी के विचारों को फैलाना है।
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