मोहम्मद जहूर ने आठ सालों तक बम धमाके में बिछड़े अपने बेटे की तलाश की और वो भारत की एक जेल में बंद मिला। उस बेटे पर कोई आरोप नहीं है, फिर भी जहूर एक साल की जद्दोजहद के बाद भी उसे छुड़वा नही पाए।
पाकिस्तानी नागरिक मोहम्मद जहूर की किस्मत बॉलीवुड की फिल्मों जैसी नहीं है। 9 वर्ष पूर्व उनका बेटा मोहम्मद इरफान समझौता एक्सप्रेस से भारत से पाकिस्तान यानी अपने घर लौटते हुए गायब हो गया। ये मामला उसी दिन का है, जिस दिन समझौता एक्सप्रेस में बम धमाके हुए थे। 2007 के उस धमाके में 60 यात्रियों की मौत हो गई थी।
उस वक्त इरफान के डीएनए सैंपल को किसी भी अज्ञात लाश के डीएनए सैंपल से मिलान नहीं हो पाया, जिसके बाद उसे 'गुमशुदा' घोषित कर दिया गया। इरफान के पिता मोहम्मद जहूर ने उसकी काफी तलाश की, लेकिन 2015 तक उसक कोई पता नहीं चला। 2015 में पता चला की इरफान अमृतसर की एक जेल में बंद है और उस पर कोई आरोप नहीं है। जहूर ने उसके बाद इरफान से संपर्क करने की कई कोशिशें की। उसने पाकिस्तान के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से भी मामले में हस्तक्षेप करने को कहा, लेकिन सब व्यर्थ रहा।
जहूर ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका
पाकिस्तान की सरकार की ओर से कोई भी कारवाई न होता देख जहूर ने भारत की सरकार से संपर्क किया। उसने अपने बेटे की डीएनए रिपोर्ट, फोटोग्राफ और पासपोर्ट की कॉपी भी भारतीय अधिकारियों को दी, लेकिन यहां भी उसकी कोशिशों का कोई असर नहीं हुआ।
जहूर ने मजबूर होकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उसे वहां निराश नहीं होना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एके सिकरी और जस्टिस आरके अग्रवाल की बेंच ने जहूर की याचिका स्वीकार कर ली और केंद्र को निर्देश दिया कि वो ये पता कर कि क्या इरफान वाकई में भारत की जेल में बंद है?
जहूर के वकील केएल जंजानी ने कोर्ट में दलील दी कि इरफान को गैर कानूनी तरीके से गिरफ्तार किया गया है क्योंकि उसके खिलाफ अपराध का एक भी मामला नहीं है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, 2007 में इरफान अपनी पढ़ाई से संबंधित खरीदारी करने के लिए दिल्ली आया था। वह समझौता एक्सप्रेस से लाहौर लौट रहा था, जबकि 18-19 फरवरी, 2007 की रात उस ट्रेन में बम धमाके हुए। हादसे के बाद इरफान का भाई भारत आया और उसकी काफी तलाश की लेकिन उसकी कोई जानकारी नहीं मिली।