ब्रिटेन में मिले कोरोना वायरस के नए रूप के चलते भारत सरकार सतर्क हो गई है। सरकार ने आदेश दिया है कि ब्रिटेन से आने वाले यात्रियों का भारत आगमन पर कोरोना जांच की जाएगी। वहीं, जो भी यात्री संक्रमित पाया जाएगा, उसके लिए अलग से आइसोलेशन की व्यवस्था की जाएगी।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ब्रिटेन में सामने आए वायरस को देखते हुए 'मानक संचालन प्रक्रिया' (एसओपी) जारी की है। बताया गया है कि ब्रिटेन में कोरोना वायरस का म्यूटेशन वायरस में 17 बदलावों के साथ हुआ है। इस वायरस की चपेट में आने वाले ज्यादातर युवा लोग हैं। यह वायरस ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है। ऐसे में 25 नवंबर से लेकर अब तक जितने भी लोग ब्रिटेन से भारत आए हैं, उनके लिए एसओपी जारी किया गया है।
एसओपी के मुताबिक, 21 से 23 दिसंबर के बीच ब्रिटेन से भारत आए यात्रियों में अगर कोरोना का संक्रमण पाया जाता है, तो उन्हें इस खास स्ट्रेन (वायरस का नया रूप) के लिए अलग से जांच करवानी होगी। इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। यात्रियों को 14 दिनों की यात्रा का विवरण भी देना होगा।
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इसके मुताबिक, ब्रिटेन से आने वाले यात्री के कोरोना संक्रमित होने पर इन्हें राज्य सरकार के आइसोलेशन सेंटर में रखा जाएगा। नमूनों को जांच के लिए एनआईवी पुणे भेजा जाएगा। अगर संक्रमित व्यक्ति में साधारण कोरोना वायरस पाया जाता है, तो उसे होम आइसोलेशन में भी रखा जा सकता है।
एसओपी के मुताबिक, लेकिन अगर व्यक्ति में कोरोना का नया रूप पाया जाता है, तो उसे 14 दिन सरकारी आइसोलेशन में बिताने होंगे। जहां एक बार फिर उसकी कोरोना जांच की जाएगी। 24 घंटे के अंतराल में दो बार नमूनों के निगेटिव आने पर ही व्यक्ति को छुट्टी दी जाएगी। वहीं, 25 नवंबर से अब तक ब्रिटेन से भारत आए लोगों की जानकारी ब्यूरो आफ इमिग्रेशन संबंधित राज्य सरकारों को देगा।