सियोल में होने वाली एनएसजी सदस्य देशों की बैठक में भले ही भारत की सदस्यता पर चर्चा न हो, मगर इस बैठक में भारत के दावे पर चर्चा की संभावना बढ़ गई है। अमेरिका और रूस इस मोर्चे में भारत की राह में रोड़ा अटका रहे चीन को कूटनीतिक पहल कर रहा है।
इसके अलावा 24 जून को सिओल में होने वाली बैठक के ठीक एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की होने वाली मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है। भारत मान कर चल रहा है कि सिओल की बैठक में एनएसजी में शामिल होने के मामले में उसका हाथ पूरी तरह खाली नहीं रहेगा।
भारत को इस बैठक से पहले एनएसजी के कुछ और सदस्य देशों को भी साध लेने की उम्मीद है। इस मामले में चीन के रुख में आई हल्की सी नरमी को भारत की कूटनीतिक पहल की असर के रूप के रूप में भी देखा जा रहा है।
विदेश मंत्रालय केसूत्रों ने कहा कि सिओल बैठक से भारत फिलहाल नाउम्मीद नहीं है। बैठक होने में अभी दो दिन शेष हैं। महज 24 घंटे बाद कुछ सकारात्मक बदलाव आए हैं। अब तक की स्थिति यह है कि सिओल की बैठक में भारत के दावे पर चर्चा की संभावना बढ़ गई है।
अगर बैठक में दावे पर चर्चा भी हो गई तो यह एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी होगी। क्योंकि इसके बाद भारत एनएसजी के अन्य सदस्य देशों को साधने में जुट जाएगा और इसका असर चीन के भावी रुख पर भी पड़ेगा।
भारत की कूटनीतिक पहल का असर दिखने का दावा करते हुए उक्त सूत्र ने बताया कि चीन के रुख में आया बदलाव हालांकि बहुत बड़ा नहीं है, मगर इतना जरूर है कि उसके रुख में लचीलापन दिखाई दे रहा है।
बहरहाल बैठक के दो दिन पूर्व अब भारत की निगाहें गुरूवार को होने वाली पीएम मोदी-जिनपिंग मुलाकात पर है। इसके अलावा भारत की निगाहें अमेरिका और रूस की ओर से खुद के लिए शुरू की गई कूटनीतिक दांव पर है।