जद(यू) के नेता और बिहार के मुख्यमंत्री कभी बिहार में सुशासन बाबू के नाम से मशहूर हो गए थे। सत्ता में मजबूत पकड़ बनाए रखने में माहिर नीतीश कुमार के बारे में आम है कि उन्हें किसी का साथ पकड़ने, छोड़ने में हिचक नहीं होती। वह पहले से इसके लिए जमीन तैयार कर लेते हैं। जद (यू) के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि वह पार्टी, विचारधारा, लोगों के हित से पहले खुद का हित देखकर राजनीति करते हैं।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फिर चर्चा में हैं। इस बार चर्चा का कारण कभी नीतीश कुमार की आंख का तारा रहे पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद पवन वर्मा और चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर द्वारा उठाए जा रहे सवाल हैं। पवन वर्मा के पत्र पर बिना किसी का नाम लिए नीतीश कुमार ने कहा कि जहां जाना है वहां जाएं। इस पर कोई एतराज नहीं है। नीतीश कुमार ने पवन वर्मा की तरह सवाल उठाने वालों को दल छोडऩे के लिए शुभकामनाएं भी दे दी हैं। पार्टी के भीतर इस तरह की पैदा हुई स्थिति के कारण नीतीश कुमार चर्चा में हैं।
नीतीश कुमार और पवन वर्मा के बीच में छिड़े राजनीतिक संग्राम पर राजद के नेता तेजस्वी यादव ने भी तंज कसा है। तेजस्वी यादव ने जद(यू) को विचार धारा के स्तर पर कंगाल पार्टी की संज्ञा देते हुए नीतीश कुमार की चुटकी ली है। राजद के तेजस्वी खुद को नीतीश कुमार का प्रतिद्वंदी चेहरा मानते हैं। राजद ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए तेजस्वी को पार्टी का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर रखा है।
लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार पटना विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से निकले नेता है। 1990 में बिहार विधानसभा में जनता दल को स्पष्ट बहुमत मिला था। लालू प्रसाद यादव राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। तब नीतीश कुमार लालू प्रसाद की आंख का तारा कहे जाते थे। 1994 में नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद का साथ छोड़ दिया। क्रांतिकारी नेता जार्ज फर्नांडीज के द्वारा समता पार्टी गठित करने के बाद नीतीश कुमार उनके साथ आ गए। समता पार्टी ने भाजपा के साथ मिलकर अपनी राजनीतिक यात्रा को आरंभ किया। नीतीश कुमार की राजनीति बिहार में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के विरोध पर टिक गई। शरद यादव ने अपने अलग पार्टी जद(यू) बनाई थी।
2014 में लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बिहार में सफलता के झंडे गाड़ दिए। बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। यह भी जद(यू) के तत्कालीन अध्यक्ष शरद यादव की इच्छा के विपरीत हुआ। नीतीश कुमार ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में महादलित समाज के जीतनराम मांझी का चुनाव किया। जीतनराम मांझी मुख्यमंत्री बने। कुछ महीने में ही नीतीश कुमार जीतनराम मांझी की कार्यप्रणाली से ऊब गए। इसके बाद नीतीश कुमार फिर मुख्यमंत्री बन गए। जीतन राम मांझी को जद(यू) छोड़कर हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) बनानी पड़ी।