अफ्रीकी सेनेगल में नियोकोलो-कोबा राष्ट्रीय उद्यान को यूनेस्को ने खतरे की सूची से हटा दिया है। साथ ही यूनेस्को ने प्राकृतिक स्थल के संरक्षण की स्थिति में सुधार के लिए सेनेगल द्वारा उठाए गए सकारात्मक कदमों की तारीफ की है।
यह फैसला नई दिल्ली में विश्व धरोहर समिति (डब्ल्यूएचसी) के चल रहे 46वें सत्र की बैठक के दौरान लिया गया।
यूनेस्को के अधिकारी ने बुधवार को जानकारी देते हुए बताया कि विश्व धरोहर संपत्ति स्टोनहेंज, एवेबरी और एसोसिएटेड साइट्स (यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड नॉर्दर्न आयरलैंड) पर भी डब्ल्यूएचसी के चल रहे सत्र के दौरान चर्चा की गई। हालांकि इन्हें खतरे में पड़ी विश्व विरासत की सूची में नहीं डाला गया है।
यूनेस्को के निदेशक लाजारे एलाउंडौ असोमो ने बताया कि नेपाल के लुंबिनी और ब्रिटेन के प्राचीन स्टोनहेंज स्थल, दोनों यूनेस्को की विरासत संपत्तियां हैं। दोनों स्थलों को लेकर सत्र के दौरान चर्चा की जाएगी, क्योंकि कुछ कारणों से इन प्रतिष्ठित स्थलों की महत्ता प्रभावित हो रही है।
लाजारे एलाउंडौ असोमो ने बताया कि दोनों स्थलों को यूनेस्को की विश्व विरासत की खतरे की सूची में शामिल किया जा सकता है। इसलिए इनको लेकर जांच की जा रही है।
21 से 31 जुलाई तक भारत में आयोजन
विश्व धरोहर समिति के सत्र का उद्धाटन रविवार को दिल्ली के भारत मंडपम में हुआ। यह कार्यक्रम 21 जुलाई से 31 जुलाई तक आयोजित हो रहा है। विश्व धरोहर समिति को विश्व धरोहर से संबंधित सभी मामलों का प्रबंधन करने और विश्व धरोहर सूची में अंकित किए जाने वाले स्थलों पर निर्णय लेने का काम सौंपा जाता है। यूनेस्को में भारत के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि विशाल वी शर्मा ने कहा भारत एक सांस्कृतिक महाशक्ति है। संस्कृत से संस्कृति, संस्कृति से संस्कार और संस्कार से संस्कार सिखाए जाते हैं। दुनिया को भारत का संदेश विकास और विरासत है। उन्होंने कहा कि भारत में होने वाली यह विश्व धरोहर समिति हर भारतीय परिवार का हिस्सा है। यह सभी का प्रतिनिधित्व करती है।