जेल में मोबाइल चलने से अफसर भले ही इंकार करें, लेकिन सुबूत हकीकत बयां करने के लिए काफी हैं। जेल में बंदी मोबाइल का खुलकर इस्तेमाल कर रहे हैं। मौजमस्ती के साथ सेल्फी भी ली जा रही हैं। बंदियों की ऐसी ही एक फोटो लीकेज हुई है। बंदियों की यह फोटो फेसबुक पर आने के बाद जेल प्रशासन ने मामले की जांच बैठा दी है।
मुजफ्फरनगर के जिला कारागार में आजकल सबकुछ ठीक नहीं चल रहा। दो माह पहले जेल के बैरकों को खंगाला गया था, जिसमें बंदियों से 22 मोबाइल बरामद हुए थे। इसके बाद अफसरों ने दावा किया कि अब जेल में मोबाइल पूरी तरह बंद हो चुके हैं। इसके बाद भी जेल से रंगदारी मांगने के मामले सामने आए। शनिवार को जेल में बंदियों ने बवाल कर दिया।
अगले दिन रविवार को डीआईजी वीके शेखर ने जेल पहुंचकर आपत्तिजनक सामान बरामद किए थे। इस दौरान एक मोबाइल भी मिला था। जेल के अंदर की गतिविधियों की जानकारी बाहर न आए, इसके लिए अफसरों का पूरा ध्यान रहता है। बवाल में घायल हुए बंदियों को बाहर तक नहीं लाया गया। अंदर ही उनकी मरहम पट्टी कर मामले को दबा दिया गया।
अब जेल के अंदर से एक फोटो बाहर आई है। इस फोटो ने जेल की सुरक्षा और सख्ती की पोल खोलकर रख दी है। फोटो जेल से ही किसी बंदी ने फेसबुक पर अपलोड की है। फोटो में बंदी सेल्फी लेते हुए दिखाई दे रहे हैं। इनके चेहरों की मुस्कराहट जेल में मिल रही सुख-सुविधाओं को बयां कर रही है। फोटो के सोशल साइट्स पर वायरल होने के बाद अफसरों को भी जवाब देते नहीं बन रहा।
गोपनीय तरीके से जांच कराई गई है, जिसमें कई बात उजागर हुई हैं। फोटो में जो बंदी नजर आ रहे हैं, वह बैरक नंबर 17ए में बंद हैं। इनमें हत्या के मामले में बंद शहर की एक समाजसेविका का बेटा और शामली के एक ब्लाक प्रमुख का पति साफ नजर आ रहे हैं। पुलिस के अफसर भी जेल के कारनामों को देखकर हैरान हैं। माना जा रहा है कि जेल के अंदर से ही फेसबुक, वॉट्सअप, ट्वीटर आदि सोशल साइट्स चलाई जा रही हैं।
सोशल साइट्स पर मिले फोटो की जांच-पड़ताल कराई जा रही है कि यह कहां का है। यह भी हो सकता है कि फोटो कहीं और से काट-छांटकर बनाया गया हो, लेकिन फिर भी हम इसकी तहकीकात करा रहे हैं। जांच में दोषी पाए जाने पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
-राकेश सिंह, जेल अधीक्षक