उन्होंने कहा कि सरकार उचित रूप से हितधारकों के विचारों को ध्यान में रखेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि देश की संप्रभुता और अखंडता को संरक्षित किया जाए, जबकि देशद्रोह पर कानून की पुन: जांच और पुन: विचार किया जाए।
केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने देशद्रोह कानून के प्रावधानों को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशद्रोह कानून के प्रावधान पर फिर से विचार करने को कहा है। प्रधानमंत्री ने अप्रचलित राजद्रोह कानून को हटाने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिक स्वतंत्रता के संरक्षण, मानवाधिकारों के सम्मान और संवैधानिक स्वतंत्रता को अर्थ देने के पक्ष में अपने स्पष्ट विचार व्यक्त किए।
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उन्होंने कहा कि सरकार उचित रूप से हितधारकों के विचारों को ध्यान में रखेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि देश की संप्रभुता और अखंडता को संरक्षित किया जाए, जबकि देशद्रोह पर कानून की पुन: जांच और पुन: विचार किया जाए।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से आईपीसी की धारा 124ए, 1860 की वैधता की जांच में अपना कीमती समय नहीं लगाने और भारत सरकार द्वारा किए जाने वाले सेक्शन 124ए पर फिर से विचार करने की प्रतीक्षा करने का आग्रह किया है।
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उन्होंने कहा कि राजद्रोह कानून का मालमा कई दिनों से सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। आज हमने सुप्रीम कोर्ट को साफ-साफ बताया कि प्रधानमंत्री के आदेश पर ये फैसला लिया गया है कि राजद्रोह कानून पर हम पुनर्विचार और पुन: जांच करेंगे। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे लगभग 1500 ऐसे कानून हैं जिनकी जरूरत नहीं थी और उन्हें हमने हटाया है और राजद्रोह कानून भी पुराना कानून है।
पूर्व कानून मंत्री ने कही यह बात
वहीं, पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने कहा कि हमने पिछले कुछ महिनों और सालों में देखा है कि कैसे राजनीतिक पार्टियों ने इस क़ानून का दुरुपयोग कर संविधान के मूल मर्यादा और अक्स पर प्रहार किया। इसे जितनी जल्दी हटाया जाए बेहतर है। यह अंग्रेजों के वक्त का क़ानून है जिसका कुछ औचत्य नहीं है।
कांग्रेस ने कोर्ट से की अपील
इस बीच कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि केंद्र ने कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा कि वे राष्ट्रद्रोह के प्रावधान पर पुनर्विचार करने के लिए तैयार है। हमारा मानना है कि इस धारा को भारत के फौजदारी से निकाल देना चाहिए। ऐसा लगता है कि सरकार नहीं चाह रही किन्यायालय इस पर कोई फैसला ले।