केंद्रीय गृह मंत्रालय, एयर इंडिया के नामित मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) कैंपबेल विल्सन को सुरक्षा मंजूरी (सिक्योरिटी क्लियरेंस) देने के आवेदन की जांच कर रहा है। पूरी तरह से बैकग्राउंड की जांच पूरी होने के बाद इसे मंजूरी दी जाएगी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
टाटा संस ने इस साल 27 जनवरी को घाटे में चल रही एयरलाइन का सरकार से टेक ओवर लिया था। टाटा संस ने 12 मई को विल्सन की नियुक्ति की घोषणा की थी।
मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि एयर इंडिया के नामित सीईओ कैंपबेल विल्सन को सिक्योरिटी क्लियरेंस देने के लिए आवेदन पर विचार किया जा रहा है और उनकी बैकग्राउंड की जांच पूरी होने के बाद मंजूरी दी जाएगी।
विल्सन, सिंगापुर एयरलाइंस की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी स्कूटर एयर के सीईओ रहे हैं। सिंगापुर एयरलाइंस, टाटा समूह का एक जॉइंट वेंचर पार्टनर है।
इंडस्ट्री के सूत्रों ने बताया कि सिक्योरिटी क्लियरेंस में समय लग रहा है, इसलिए विल्सन को औपचारिक रूप से एयर इंडिया का प्रभार लेना बाकी है।
तुर्की के बिजनेसमैने ठुकराया था सीईओ बनने का प्रस्ताव
इससे पहले टाटा संस ने 14 फरवरी को तुर्की एयरलाइंस के पूर्व चेयरमैन इलकर आयशी को एयर इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर व सीईओ बनने की पेशकश की थी। हालांकि आयशी ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। आयशी ने कहा था कि भारतीय मीडिया ने इसे अलग रंग दे दिया है। उन्होंने कहा था कि वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए मेरे हिसाब से इस पेशकश को स्वीकार करना सम्मानजनक फैसला नहीं होगा।
एर्दोगान के साथ रहे कथित करीबी संबंध
उन्होंने तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तईप एर्दोगान के साथ अपने कथित करीबी संबंधों को लेकर समूह में शामिल होने से इनकार कर दिया था। एर्दोगान का अतीत में जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर कई मौकों पर भारत विरोधी रुख रहा है।
सरकारी नियमों के तहत, निजी कंपनियों में प्रमुख कर्मियों की नियुक्ति के लिए गृह मंत्रालय की मंजूरी अनिवार्य है, जिसमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
20 जून को एयर इंडिया के कर्मचारियों को एक संदेश में विल्सन ने कहा था कि एयरलाइन के 'सर्वश्रेष्ठ वर्ष अभी आने बाकी हैं' और इसे विश्व स्तरीय एयरलाइन बनाने की यात्रा के लिए 'बड़े और छोटे, आसान और कठिन' प्रयासों की आवश्यकता होगी।