फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ऑक्सीजन संकट: प्राणवायु के अवैध सौदागरों की खैर नहीं, टोह में लगी हैं सुरक्षा एजेंसियां

Fri, 23 Apr 2021 09:18 PM IST
गौरव पाण्डेय जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली

सार

केंद्र सरकार इस बात को लेकर खासी चिंतित है कि एक तरफ अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी है तो दूसरी ओर इसके अवैध सौदागर सोशल मीडिया के जरिए अवैध बाजार खड़ा कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर जिस तरह मददगारों के नंबर घूम रहे हैं, उनके बीच ही ये अवैध सौदागर अपने कारोबार को आगे बढ़ाते हैं। 
विज्ञापन
ऑक्सीजन सिलिंडर (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि सोशल मीडिया के जरिए 'प्राण वायु' का बाजार खड़े करने वालों की टोह में कई सुरक्षा एजेंसियां लगी हुई हैं। राज्यों में भी लोकल पुलिस, ऑक्सीजन का अवैध स्टॉक रखने वालों पर शिकंजा कसेगी। सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट बताती है कि अनेक शहरों में लोग हजारों लाखों रुपये देकर ऑक्सीजन सिलिंडर खरीद रहे हैं। वहां के लोगों के बीच ऐसी अफवाहें फैलाई जा रही हैं कि आने वाले समय में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ सकता है। यही वजह है कि वे लोग ब्लैक में ऑक्सीजन सिलिंडर खरीद रहे हैं।

विज्ञापन


बता दें कि कई दिनों से सोशल मीडिया में कोरोना संक्रमित मरीजों की मदद करने वाले अनेक ग्रुप सक्रिय दिखाई पड़ रहे हैं। इनमें कई पार्टियों के नेता भी हैं। दरअसल, यह मुहिम पहले इन्हीं नेताओं के की ओर से शुरू की गई थी। ऐसा नहीं है कि सोशल मीडिया पर मदद करने के लिए शुरू हुआ यह प्रचार पूरी तरह भ्रामक है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी के विधायक दिलीप पांडे, युवा कांग्रेस के अध्यक्ष बीपी श्रीनिवास और भारतीय जनता युवा मोर्चा की नेशनल इंचार्ज (कानूनी) चारु प्रज्ञा सहित कई दूसरे लोगों ने कोरोना पीड़ितों की मदद की है। इन लोगों ने कोरोना मरीजों के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन, ऑक्सीजन और प्लाज्मा आदि का इंतजाम किया है। लेकिन, इनके साथ ही सोशल मीडिया पर उन लोगों ने भी अपना अभियान शुरू कर दिया, जो ऑक्सीजन की ब्लैक मार्केटिंग के जरिए पैसा कमाना चाहते थे।

सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि चारों तरफ से मेडिकल ऑक्सीजन खत्म होने की खबरें आ रही हैं। दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर ऐसे मददगारों की संख्या बढ़ती चली गई जो कोरोना के मरीजों को कुछ ही देर में प्राणवायु का सिलिंडर मुहैया कराने का दावा करते हैं। इसका मतलब है कहीं तो ऑक्सीजन का स्टॉक है। ई-कॉमर्स बाजार पर भी ऑक्सीजन के सिलिंडर उपलब्ध हैं। ये अलग बात है कि वहां तय रेट के मुकाबले कई गुणा अधिक कीमत देनी पड़ती है। दरअसल, अनेक लोग ऑक्सीजन का स्टॉक कर रहे हैं। उन्हें यह लगता है कि कोरोना अभी कम नहीं होगा। ऐसे में ऑक्सीजन की मांग बढ़ेगी और वो मनमाने दाम पर प्राणवायु के इन सिलिंडरों को बेचकर मुनाफा कमा पाएंगे। 
विज्ञापन


ऑल इंडिया इंडस्ट्रियल गैसेस मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन की ओर से सभी राज्यों में मेडिकल इस्तेमाल के लिए सिलिंडरों की सप्लाई की जाती है। इसके प्रतिनिधि राहुल सेठी बताते हैं कि हमारी एसोसिएशन की ओर से तकरीबन हर राज्य में ऑक्सीजन की सप्लाई की जाती है। अभी कई दिनों से यह मांग बहुत ज्यादा बढ़ गई है। एक राज्य से दूसरे राज्य में छोटे सिलिंडर पहुंच रहे हैं। लोगों ने इसे स्टॉक करना शुरू कर दिया है। यह बहुत गलत है। इससे उन मरीजों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाएगी, जो मौजूदा समय में कोरोना से जूझ रहे हैं। दो तीन दिन से अनेक लोग सिलिंडर लेने के लिए फोन करते हैं। चूंकि सिलिंडर एक दो व्यक्ति को दिया जा सकता है, लेकिन सभी को नहीं। ऐसी स्थिति में कंपनी सिलिंडर को रिफिल करती है। कोई खाली सिलिंडर ले आए और उसे भरा हुआ दे दिया जाएगा। एसोसिएशन की ओर से पश्चिम बंगाल में सात, यूपी में 51, महाराष्ट्र में 75, त्रिपुरा में एक, दिल्ली एनसीआर में 19, कर्नाटक में 36, गुजरात में 30, हरियाणा में सात और पंजाब में चार शहरों से मेडिकल ऑक्सीजन की सप्लाई दी जाती है। इस तरह दूसरे राज्यों में भी ऑक्सीजन पहुंचाई जाती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें