देश के संविधान, धर्माचार्य, संस्कार और पारिवारिक, सामाजिक व्यवस्था ने देश के युवाओं को कट्टरपंथ से बचाया है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने लोकसभा में सांसद डा. सत्यपाल सिंह के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि इन्ही खूबियों के चलते केवल 50 युवाओं के ही भटककर कट्टरवाद की तरफ जाने की सूचना है। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत सरकार, राज्य सरकारों के साथ मिलकर कट्टरवाद के विरुद्ध कार्यक्रम चलाती है और यह देश की समग्र नीति का नतीजा है।
विदेश मंत्री ने सांसद के सवाल का उत्तर देते हुए कहा कि कट्टरवाद का खतरा भारत में ही नहीं पूरे विश्व में है और भारत के हर प्रदेश में है। इसको लेकर केन्द्र सरकार राज्य सरकारों के साथ संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि जहां तक भारत का प्रश्न है तो यदि हम तुलना करें तो केवल 50 युवाओं के इसमें फंसकर उस ओर जाने की सूचना है। इसका कारण हमारे देश का धर्म निरपेक्ष संविधान है।
विदेशमंत्री ने कहा कि भारत में धर्माचार्य युवाओं को अमन चैन की शिक्षा देते हैं। इसके अलावा हमारे देश में पारिवारिक प्रथा भी युवाओं कट्टरवाद के चंगुल में फंसने से रोकती है। मां-बाप, भाई, बहन अपनों पर निगाह रखते हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत में संस्कार अहिंसात्मक है। हम हिंसा का विरोध करते हैं।