पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़ा बड़ा अपडेट सामने आया है। चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, राज्य में दूसरी पूरक मतदाता सूची 27 या 28 मार्च तक जारी की जा सकती है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अधिकारी ने बताया कि अब तक लंबित सूची में से लगभग 36 लाख मतदाता प्रविष्टियों का निपटान किया जा चुका है। इसी आधार पर दूसरी पूरक सूची जारी की जाएगी।
अधिकारी ने कहा शुक्रवार या शनिवार शाम तक सूची जारी होने की संभावना है, हालांकि यह प्रक्रिया विभिन्न बूथों से मिलने वाले शेष डेटा पर निर्भर करेगी।
तकनीकी समस्याएं बनी चुनौती
पहली पूरक सूची जारी होने के दौरान जो दिक्कतें सामने आई थीं, वे अब तक पूरी तरह दूर नहीं हो सकी हैं। कई मामलों में अदालतों द्वारा ई-साइन की गई सूचियां तो अपलोड कर दी गई हैं, लेकिन कुछ स्थानों पर तकनीकी गड़बड़ियां (ग्लिच) लगातार बाधा बन रही हैं। इसके अलावा, कई बूथों से डेटा अब भी प्राप्त नहीं हुआ है, जिससे पूरी प्रक्रिया की गति प्रभावित हो रही है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत प्रक्रिया
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाते हैं, उन्हें ट्रिब्यूनल में अपील करने का पूरा अधिकार मिलना चाहिए। हालांकि, इन ट्रिब्यूनलों के गठन को लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। राज्य सरकार ने इसके लिए चार स्थानों का प्रस्ताव दिया है, जबकि कलकत्ता हाई कोर्ट ने न्यू टाउन स्थित ज्यूडिशियल अकादमी को संभावित स्थान के रूप में सुझाया है।
ट्रिब्यूनल में देरी से बढ़ी चिंता
ट्रिब्यूनल के गठन में हो रही देरी ने प्रभावित मतदाताओं की चिंता बढ़ा दी है। जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, वे अब भी इस असमंजस में हैं कि आखिर वे अपनी शिकायत लेकर कहां जाएं और किस प्रक्रिया के तहत अपील करें। स्पष्ट व्यवस्था के अभाव में बड़ी संख्या में मतदाता खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।
पहले क्या हुआ था?
अगर पहले की स्थिति पर नजर डालें, तो पहली पूरक सूची सोमवार को जारी की गई थी, लेकिन इसमें हटाए गए नामों या निपटाए गए मामलों की सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं की गई। इस पारदर्शिता की कमी को लेकर कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर चिंता जताई।
मतदाताओं की संख्या में बड़ी गिरावट
वहीं, स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) प्रक्रिया के बाद राज्य में मतदाताओं की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। करीब 58 लाख नाम हटाए जाने के बाद कुल मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ रह गई। इसके बाद 28 फरवरी को जारी अंतिम सूची में यह आंकड़ा और घटकर लगभग 7.04 करोड़ पहुंच गया। इनमें से 60 लाख से अधिक नाम अब भी न्यायिक जांच (Under Adjudication) के दायरे में रखे गए हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया और अधिक जटिल हो गई है।