टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा ने कहा कि 2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स में सिंगापुर का झंडा सबसे ऊपर होने पर मैंने सोचा कि पहले स्थान पर इंडिया का झंडा होना चाहिए। इस दौरान हर मैच हारने के बाद भी मैंने खुद को गोल से नहीं भटकने दिया। पढ़ाई से भी ज्यादा टेबल टेनिस को महत्व दिया। इस बार ऑस्ट्रेलिया की जमीन पर कॉमनवेल्थ में चार मेडल जीतकर मैंने देश के लिए देखे सपने को पूरा किया। मनिका बत्रा ने ये बातें अमर उजाला फाउंडेशन और माइंड्स इग्नाइटेड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम ‘नजरिया, जो जीवन बदल दे’ में कही।
इंडिया इस्लामिक सेंटर में आयोजित कार्यक्रम नजरिया के मंच पर मनिका को भावुक देखकर उनके फैंस की आंखों में भी पानी छलक आया। उनके बचपन से लकर अब तक के देश के लिए सम्मान को सभी ने सलाम किया। आगामी खेलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रौशन करने की ख्वाहिश जताई। अमर उजाला के जरिये पहली बार मंच से दर्शकों की भीड़ को खुद के साथ देख मनिका काफी उत्साहित दिखीं। उन्होंने पूरा जीवन टेबल टेनिस को समर्पित करने और महिलाओं को इस खेल में आगे बढ़ाने के लिए कटिबद्ध नजर आईं।
शुक्ला से मुन्तशिर बन गए मनोज
10 वीं कक्षा में मिर्जा गालिब की पारसी भाषा में लिखी शेरो शायरी ने बॉलीवुड के गीतकार मनोज शुक्ला को इतना प्रभावित कर दिया कि उन्होंने अलग पहचान बनाने के लिए सर नेम बदलने का सोच लिया। एक बार चाय के ठेले पर ऑल इंडिया रेडिया पर सुने मुशायरे में मुन्तशिर अल्फाज इतने भाये कि उन्होंने मनोज के साथ मुन्तशिर को जोड़ दिया। इसके बबाद अपने किरदार को नया रूप देकर निखारा। उन्होंने कार्यक्रम में संदेश दिया कि हमें खुद को समझकर ही आगे बढ़ना चाहिए। ताकि, मंजिल तक पहुंचने का संकल्प इतना मजबूत हो जाए कि कोई आपको सफलता की सीढ़ी से नीचे ना उतार सके।
पायल ठाकुर बोलीं आवाज ही मेरी ताकत है
कुल्लू से आईं 14 वर्षीय दृष्टिबाधित पायल ठाकुर ने कहा कि वह अमर उजाला के मंच पर पहुंचकर बेहद खुश हैं। उन्होंने अपनी मधुर आवाज में गाए गीतों से यह बयान कर दिया कि वह किसी की मोहताज नहीं, हुनर ही उनकी ताकत है।
इसरो के वैज्ञानिकों ने दिखाया इंडिया का दम
इसरो के वैज्ञानिकों वीएम चौधरी और इम्तियाज खान ने कहा कि एक समय ऐसा था कि भारत दूसरे देशों से सेटेलाइट लेता था। इसे लेकर विदेशी भारत का मजाक बनाते थे। लेकिन, वर्तमान में भारत इतना सक्षम हो गया है कि विदेशी आज भारत से सेटेलाइट लांच करवाने की लाइन में खड़े हैं। उन्होंने बताया कि सेटेलाइट के जरिये देश के हर क्षेत्र में विकासपरक कार्य किए जा रहे हैं, ताकि हम किसी भी मामले में विदेशों से पीछे न रह जाएं।
तंत्र के ज्ञान से जागती है चेतना
तंत्र विज्ञान के ज्ञाता डॉ राजेश राज ने जीवन का वह अनुभव साझा किया जब वे कैलिफोर्निया में थे। एक ब्रिटिश द्वारा भारत की शोध प्रणाली को पुराना और बेकार बताकर बेइज्जती की गई थी, लेकिन उन्होंने इसके बाद 10 सालों तक करीब 65 देशों में घूमकर तंत्र पर शोध किया और फिर तंत्र के जरिये चेतना से मानव जीवन को शांतिपूर्वक और विनम्रता प्रेरक बनाने की खोज की। उन्होंने कहा कि चेतना से ही सम्पूर्ण जगत जुड़ा है इसीलिए सभी मेडिटेशन के जरिये अपनी चेतना को समझना चाहिए।
इंटरनेट बनाता है सबको अकेला
साइबर एक्सपर्ट ने इस कार्यक्रम में कहा कि आज सबस सोशल मीडिया पर निर्भर हो गए हैं सब ऑन लाईन दोस्त तलाशते हैं और फिर धोखे का शिकार होते हैं। उन्होंने बताया कि जरूरी है कि इंटरनेट के जाल से खुद को जितना हो सके बचाकर रखा जाए ताकि आपके असली रिश्ते न हो जाएं। उन्होंने कहा है सोशल मीडिया पर धोखे का शिकार होने वाले करीब 25 हजार बच्चों पर शोध कर चुके हैं, जिससे यह साफ होता है कि इंटरनेट ने पूरी तरह हम पर कब्जा कर लिया है।
जाल बट्टा से शुई व्यंगकार आलोक पुराणिक की कहानी
वर्तमान में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर आलोक पुराणिक ने कहा कि उन्होंने व्यंग लेखन की शुरूआत अमर उजाला के साथ जाल बट्टा सीरीज से की थी, जिसे काफी समय तक उन्होंने चलाया और बाजार की स्थिति के मद्देनजर उन्होंने समाज के हर पहलू को लाभ से जोड़कर पेश किया अपने व्यंगों से पाठकों को सच्चाई से रूबरू करवाया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने वाक्यों की व्यंगात्मक जुगलबंदी से समां बांधे रखा और दर्शकों को बाजारवाद के चेहरे से मिलवाया।