देश का मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी) बनाने के लिए योग्य लोगों की छंटनी करने को बनी सर्च कमेटी की लापरवाही सामने आई है। कमेटी ने दो सेवारत वरिष्ठ सूचना आयुक्तों के आवेन करने पर भी उन्हें सीआईसी पद के लिए शॉर्टलिस्ट नहीं किया, बल्कि चार अन्य लोगों के नाम चिह्नित कर आगे भेज दिए।
इस प्रक्रिया से जुड़े कागजात सरकार की तरफ से सार्वजनिक किए जाने पर इस बात का भी खुलासा हुआ है कि सर्च कमेटी की तरफ से चिह्नित चार लोगों ने इस पद के लिए कोई दिलचस्पी ही नहीं दिखाई। कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली सर्च कमेटी ने पांच नाम शार्ट लिस्ट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली चयन समिति को भेजे थे, जिसमें वित्त मंत्री अरुण जेटली और विपक्ष के सबसे बड़े दल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे भी शामिल थे।
सर्च कमेटी में कैबिनेट सचिव के साथ पांच सदस्य प्रधानमंत्री के अतिरिक्त सचिव, कार्मिक विभाग के सचिव, व्यय विभाग के सचिव और सूचना व प्रसारण मंत्रालय के सचिव शामिल थे, जबकि आर्थिक वृद्धि केंद्र के निदेशक स्वतंत्र सदस्य थे। रिपोर्ट के मुताबिक, व्यय विभाग के सचिव ने भी सीआईसी बनने का दावा पेश किया था, जिसे उन्होंने पीएमओ के निर्देश पर वापस ले लिया था।
बता दें कि सरकार की तरफ से 23 अक्तूबर, 2018 को कार्मिक विभाग की वेबसाइट पर नए सूचना आयुक्त की नियुक्ति का विज्ञापन जारी किया था। इसके बाद आए 68 आवेदनों में केंद्रीय सूचना आयुक्त सुधीर भार्गव, बिमल जुल्का और दिव्य प्रकाश सिन्हा भी शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक, कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली सर्च कमेटी ने जुल्का और सिन्हा को 5 शार्ट लिस्ट उम्मीदवारों में शामिल नहीं किया था।
कमेटी की तरफ से 5 सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सुधीर भार्गव, पूर्व एमएसएमई सचिव माधव लाल, गुजरात के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव एसके नंदा, प्रशासनिक सुधार विभाग के पूर्व सचिव आलोक रावत और पूर्व व्यय सचिव आरपी वाटल को शार्ट लिस्ट किया गया।
हालांकि इनमें से माधव लाल, एसके नंदा, आलोक रावत और आरपी वाटल की तरफ से सीआईसी पद के लिए आवेदन नहीं करने के बावजूद सर्च कमेटी ने उनके नाम चिह्नित करते हुए शार्ट लिस्ट किए गए लोगों की सूची में डाल दिया। यह सूची प्रधानमंत्री कार्यालय भेजी गई। बाद में सुधीर भार्गव को इस महीने के शुरू में देश के मुख्य चुनाव आयुक्त के तौर पर नियुक्ति दे दी।
ऐसे हुआ लापरवाही का खुलासा
सर्च कमेटी की गड़बड़ी सामने लाने वाले आरटीआई कार्यकर्ता वेंकटेशन नायक ने एक महिला आवेदक की अनदेखी का भी मुद्धा उठाया। वेंकटेश के मुताबिक, कर्नाटक की मुख्य सचिव रह चुकी इस महिला को गुजरात के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव के मुकाबले कम गुणांक दिए गए। यह अपने आप में रहस्यात्मक है।
बता दें कि इस मामले के कागजात रिटायर्ड कमोडोर लोकेश बत्रा और अंजलि भार्गव के संघर्ष से तब सार्वजनिक किए गए, जब इन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सीआईसी की नियुक्ति से जुड़े कागजातों का खुलासा कराने की मांग की। (एजेंसी)