विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिये शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की ओर से ‘सामूहिक कार्रवाई’ की पुरजोर वकालत की और कहा कि इस क्षेत्र के समक्ष पेश आने वाली सुरक्षा चुनौतियां केवल भौतिक या राजनीतिक सीमाओं तक सीमित नहीं है ।जयशंकर ने यह टिप्पणी वीडियो कॉन्फ्रेंस से एससीओ के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों के सम्मेलन में की। एससीओ चीन के प्रभाव वाला समूह है जो राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों से संबंधित है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर ने इस बात को रेखांकित किया कि इस क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियां केवल भौतिक या राजनीतिक सीमाओं तक सीमित नहीं है और आतंकवाद से एससीओ क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता को बड़ा खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिये सामूहिक कार्रवाई की जरूरत है ।
सम्मेलन में कोरोना वायरस के कारण उत्पन्न स्थिति और इस महामारी के कारण कारोबार व आर्थिक और सामाजिक प्रभावों से निपटने में एससीओ देशों के बीच समन्वय के संभावित क्षेत्रों के बारे में चर्चा की गई। विदेश मंत्रालय के अनुसार, ‘जयशंकर ने कोविड-19 महामारी के खिलाफ संयुक्त लड़ाई में भारत की मजबूत प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने एससीओ देशों के बीच सूचनाओं, विशेषज्ञता तथा अच्छे अनुभवों को साझा करने की तत्परता पर भी जोर दिया।’
विदेश मंत्रियों ने सेंट पीटर्सबर्ग में आगामी एससीओ शिखर सम्मेलन की तैयारियों के बारे में भी चर्चा की। विदेश मंत्री ने महामारी के मद्देनजर भारत द्वारा उठाए गए कदमों को भी रेखांकित किया जिसमें 20 लाख करोड़ रूपये के विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा भी शामिल है। मंत्रालय के अनुसार, ‘उन्होंने एससीओ सदस्य देशों के बीच लाभाकारी कारोबार-आर्थिक सहयोग के लिए उपयुक्त माहौल सृजित करने के बारे में चर्चा की।’