भारतीय मूल समेत अमेरिका के वैज्ञानिकों ने इबोला की रोकथाम के लिए एक नया कृत्रिम डीएनए टीका विकसित किया है। वैज्ञानिकों ने इसे सुरक्षित और लंबे समय तक विषाणुओं से सुरक्षा प्रदान करने वाला माना जा रहा है।
अमेरिका के विस्टर इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों ने एक अनोखे तरीके से कृत्रिम डीएनए टीका विकसित किया है, जो वायरस ग्लाइकोप्रोटीन को निशाना बनाता है। ‘जर्नल ऑफ इंफेक्शियस डिजीजेज’ में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, इस टीके की आखिरी खुराक के साल भर बाद मजबूत प्रतिरक्षा प्रक्रिया दिखाई गई है।
यह टीका सीधे त्वचा पर असर करता है। इस माध्यम से नए तरीके से विषाणुओं से तीव्र और सुरक्षात्मक प्रतिरक्षा मिली। विस्टर के टीका एवं प्रतिरक्षा उपचार केंद्र के डेविड बी वेनर ने कहा है कि इस तरह का इबोला रोधी डीएनए टीका प्रतिरक्षा में नई भूमिका निभा सकता है। गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, इबोला विषाणु के संक्रमित होने वाले 50 फीसदी रोगियों की मौत हो जाती है।