दृष्टिबाधित दिव्यांगजनों के लिए दिल्ली की भीड़ भरी सड़कों पर चलना बेहद मुश्किल भरा काम होता है। बस स्टॉप पर आने वाली बस कौन सी है और वह कहां जाएगी, इस जानकारी के लिए उन्हें हमेशा अपने आसपास खड़े लोगों पर निर्भर रहना पड़ता है। वहीं बहुत सवेरे या देर रात जब अधिक लोग नहीं होते, उन्हें यह मदद मिलना भी मुश्किल हो जाता है। लेकिन जल्दी ही दृष्टिबाधित दिव्यांगों को इस समस्या से मुक्ति मिल सकती है। आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिक एम. बालाकृष्णन ने एक ऐसी डिवाइस तैयार की है, जो दृष्टिबाधित दिव्यांगजनों और आने वाली बसों के ड्राइवर के बीच सीधे संपर्क स्थापित कर देगा। इसके जरिए दिव्यांग आसानी से अपनी मनचाही बस का चयन कर सकेंगे।
कैसे काम करेगी डिवाइस
डिवाइस का एक हिस्सा बस ड्राइवर या कंडक्टर के पास होगा, जबकि एक छोटा सा दूसरा हिस्सा दृष्टिबाधित दिव्यांग के पास होगा। इसी के जरिए वे बस चालक से 'बात' कर सकेंगे। बस स्टॉप पर खड़े दिव्यांगजन को जैसे ही किसी बस के आने की आवाज सुनाई पड़ेगी, वह अपने डिवाइस पर 'प्रेस बटन' दबाकर बस संख्या के बारे में चालक से पूछ सकेगा। संकेत मिलते ही बस चालक अपनी डिवाइस पर एक बटन दबाकर अपनी बस संख्या दृष्टिबाधित यात्री को बता देगा, जिसे यात्री अपनी डिवाइस पर सुन सकेगा। अगर बस उसके काम की हुई तो वह 'सेलेक्ट' के नाम से दूसरी बटन दबाकर चालक को इशारा कर सकेगा। इसके बाद बस चालक उसके पास बस रोककर उसे बिठा सकेगा।
दोनों डिवाइस आपस में रेडियो फ्रिक्वेंसी के जरिए जुड़ेंगी। दोनों डिवाइस लगभग 25 मीटर की दूर से भी आपस में संपर्क कर सकेंगी। एक हजार बसों में इस तरह की डिवाइस लगाने का खर्च लगभग 2.5 करोड़ रुपये आएगा। दिव्यांगजन आयुक्त कार्यालय डीटीसी भी इस तकनीकी के खरीदे जाने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है।
बढ़ सकती है इसकी उपयोगिता
वैज्ञानिक एम. बालाकृष्णन के मुताबिक यह डिवाइस सिर्फ दिव्यांगजनों के लिए ही उपयुक्त नहीं है, कमजोर नजर वाले लोगों के लिए भी उपयुक्त है। इसके अलावा तेज चलकर बस में चढ़ने में अक्षम वृद्ध लोगों और गर्भवती महिलाओं के लिए भी यह बेहद उपयोगी है। इसके माध्यम से सवारी की जानकारी मिलने के बाद चालक उनका इंतजार कर सकता है।