शिक्षक दिवस पर क्या बोलीं राष्ट्रपति मुर्मू?
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शिक्षक दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शिक्षकों से देश की आने वाली पीढ़ियों को सही दिशा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षक ऐसी पीढ़ी तैयार करें, जो वैज्ञानिक सोच विकसित करे और मानव कल्याण के लिए काम करे। राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों में देश के प्रति जिम्मेदारी और राष्ट्र प्रथम की भावना पैदा करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षक की पवित्र जिम्मेदारी विद्यार्थियों को अच्छा इंसान बनाना है। उनके मुताबिक, नैतिक सोच और व्यवहार के साथ सफलता हासिल करने वाले विद्यार्थी शिक्षक की सफलता का सबसे बड़ा उदाहरण होते हैं।
शिक्षक पर अभिभावक इतना भरोसा क्यों करते हैं?
राष्ट्रपति ने अपने लेख शेपिंग माइंड्स; बिल्डिंग द फ्यूचर में कहा कि जब माता-पिता और अभिभावक बच्चों को पढ़ने के लिए शिक्षकों के पास भेजते हैं, तो वे उन पर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं। उन्हें उम्मीद होती है कि शिक्षक बच्चों को अपने बच्चों की तरह समझेंगे और उनकी सुरक्षा तथा विकास का पूरा ध्यान रखेंगे। राष्ट्रपति ने कहा कि हर शिक्षक का धर्म है कि वह इस भरोसे को कायम रखे। शिक्षक का व्यवहार ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे बच्चों में डर, चिंता, हीन भावना या हौसला टूटने की स्थिति पैदा हो।
राष्ट्रपति ने कैसी पीढ़ी तैयार करने की बात कही?
- राष्ट्रपति ने कहा कि भारत सामाजिक समावेश को केंद्र में रखते हुए विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है। ऐसे में शिक्षकों को ऐसी पीढ़ी तैयार करनी चाहिए, जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं का सम्मान करे, वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखे और मानवता के कल्याण के लिए काम करे।
- विद्यार्थी अंत्योदय के आदर्श को समझें, पर्यावरण और सभी जीव-जंतुओं की रक्षा करें तथा व्यक्तिगत और सामूहिक उत्कृष्टता के लिए प्रयास करें। उन्होंने अपने शिक्षकों को याद करते हुए कहा कि एक स्नेही और समर्पित शिक्षक विद्यार्थी के भीतर छिपी असीम क्षमता को जगा सकता है।
- राष्ट्रपति ने नागरिकों से भी ईमानदार और समर्पित शिक्षकों को सर्वोच्च सम्मान देने की अपील की। उन्होंने उम्मीद जताई कि समर्पित शिक्षकों के योगदान से भारत लगातार सीखता रहेगा और दुनिया का नेतृत्व करेगा।
बच्चों में कौन-सी खूबियां विकसित करना जरूरी है?
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि अच्छे शिक्षक बच्चों को खुद से सोचने के लिए प्रेरित करते हैं। उनके अंदर जिज्ञासा जगाते हैं और सवाल पूछने की आदत विकसित करते हैं। विद्यार्थियों की तर्क करने और सही फैसला लेने की क्षमता को मजबूत करना भी शिक्षण का अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा कि ऐसी शिक्षा से देश को सफल उद्यमी, शानदार वैज्ञानिक, रचनात्मक कलाकार और नई चुनौतियों का नए तरीके से समाधान खोजने वाले नागरिक मिल सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षक सिर्फ पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाते, बल्कि बच्चों की क्षमता और आत्मविश्वास को जगाने का काम करते हैं।