सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को शनिवार को पत्र लिख कर रजिस्ट्री की ओर से जारी दो परिपत्रों पर आपत्ति जताई है। इन परिपत्रों में वकीलों के प्रसारित पत्रों और पर्चियों के जरिये कार्यवाही स्थगित करने का अनुरोध करने की प्रथा को बंद कर दिया गया है।
न्यायाधीशों की एक समिति गठित की
सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने मामलों के त्वरित निपटारा सुनिश्चित करने के लिए 5 और 22 दिसंबर को दो परिपत्र जारी किए थे। बार एसोसिएशनों की आपत्तियों के बाद, शीर्ष अदालत ने 22 दिसंबर को कार्यवाही स्थगित करने की मांग करने वाले वकीलों के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने के लिए न्यायाधीशों की एक समिति गठित की थी। समिति ने इस मुद्दे पर बार और अन्य हितधारकों के सुझाव आमंत्रित किए हैं, लेकिन शीर्ष अदालत रजिस्ट्री के परिपत्र में कहा गया है कि स्थगन पर्चियों के प्रसार की प्रथा अगले आदेश तक बंद रहेगी।
सहयोगात्मक रूप से काम किया
एससीबीए के सचिव रोहित पांडेय ने सीजेआई को लिखे खत में कहा कि बार और बेंच का प्रयास हमेशा मामलों का समय पर निपटारा करने का रहा है। मामले के निपटारे तक बार, बेंच और वादी समान हितधारक हैं और इसे हासिल करने के लिए वर्षों से सहयोगात्मक रूप से काम किया है। हमें यह जानकर खुशी हो रही है कि इस सहयोग के कारण 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने 52,000 से अधिक मामलों का निपटारा किया, जो 6 वर्षों में सबसे अधिक है। पत्र में कहा गया है कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट अंतिम विकल्प वाला न्यायालय है, इसलिए वादकारी सक्रिय रूप से अपने वकील से संपर्क करते हैं क्योंकि निर्धारित तिथि पर उनके मामले की सुनवाई नहीं होने की स्थिति में वे सबसे अधिक व्यथित होते हैं। इसलिए हमारा अनुरोध है कि स्थगन के लिए पत्र प्रसारित करने की मौजूदा प्रथा को जारी रखा जाए। साथ ही कहा कि 5 और 22 दिसंबर के परिपत्र एससीबीए से परामर्श किए बिना जारी किए गए थे।