न्यायाधीश तबस्सुम खान के समर्थन में उतरा एससीबीए
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मध्य प्रदेश की एक अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश को फैसला सुनाने के बाद कथित धमकियां मिलने और सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ आपत्तिजनक अभियान चलाए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस पूरे घटनाक्रम पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। एसोसिएशन ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों को डराने या दबाव बनाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। साथ ही मध्य प्रदेश सरकार और उच्च न्यायालय से दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
क्या है पूरा मामला और एससीबीए ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने अपने सचिव प्रज्ञा बघेल की ओर से जारी बयान में कहा कि अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान को एक आपराधिक मामले में फैसला सुनाने के बाद कथित तौर पर धमकियां दी गईं। उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणियां और डराने-धमकाने का अभियान भी चलाया गया। यह मामला उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें कथित गौरक्षक समूह के कुछ सदस्यों को एक लिंचिंग मामले में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई थी। एसोसिएशन ने कहा कि ऐसी घटनाएं न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।
दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की मांग की गई?
एससीबीए ने कहा कि वह मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय और राज्य सरकार से अपेक्षा करता है कि पूरे मामले की तुरंत, निष्पक्ष और प्रभावी जांच कराई जाए। जो लोग न्यायिक अधिकारी को धमकाने, उनके खिलाफ नफरत फैलाने या डर का माहौल बनाने में शामिल हैं, उनकी पहचान कर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए। बयान में कहा गया कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार न्यायाधीश के खिलाफ धमकियों के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है और उनकी सुरक्षा भी बढ़ाई गई है। एसोसिएशन का कहना है कि कानून का पालन कराने वाले न्यायिक अधिकारियों को खुद कानून का पूरा संरक्षण मिलना चाहिए।
जिला न्यायपालिका की भूमिका पर क्यों दिया गया जोर?
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने कहा कि जिला न्यायपालिका देश की न्याय व्यवस्था की सबसे मजबूत और अहम नींव है। देशभर के जिला न्यायालयों में हर दिन हजारों दीवानी और फौजदारी मामलों की सुनवाई होती है। इनमें कई मामले बेहद संवेदनशील होते हैं। ऐसे में न्यायिक अधिकारियों को यह भरोसा होना चाहिए कि यदि वे अपने संवैधानिक दायित्वों का ईमानदारी से पालन करते हैं तो कानून उनकी सुरक्षा करेगा। एसोसिएशन ने कहा कि किसी भी न्यायाधीश को फैसले के कारण डर या दबाव का सामना नहीं करना पड़ना चाहिए।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर एससीबीए का क्या संदेश?
एससीबीए ने स्पष्ट कहा कि वह न्यायाधीश तबस्सुम खान के साथ मजबूती से खड़ा है और न्यायपालिका की स्वतंत्रता, गरिमा तथा निष्पक्षता की रक्षा के अपने संकल्प को दोहराता है। एसोसिएशन ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों को भयमुक्त वातावरण मिलना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है। यदि किसी न्यायाधीश को उसके फैसले के कारण धमकाया जाता है या उसके खिलाफ नफरत फैलाने की कोशिश होती है, तो यह केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं बल्कि पूरी न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। इसलिए ऐसे मामलों में त्वरित और कड़ी कार्रवाई जरूरी है।