सुप्रीम कोर्ट ने 16 वर्षीय मुस्लिम लड़की को विवाह की अनुमति देने के पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के हालिया फैसले को चुनौती देने वाली राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की याचिका पर सोमवार को नोटिस जारी किया। हाईकोर्ट ने फैसले में कहा था कि एक मुस्लिम लड़की यौवन प्राप्त करने के बाद या 15 साल की उम्र में शादी का अनुबंध कर सकती है।
मामले की सुनवाई सात नवंबर को
एनसीपीसीआर की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह एक गंभीर मुद्दा है और फैसले में टिप्पणियों पर रोक लगाने की मांग की। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस मुद्दे की जांच करेगी और मामले की सुनवाई सात नवंबर को तय की है। उच्च न्यायालय की एकल-न्यायाधीश पीठ ने 13 जून को पठानकोट के एक मुस्लिम दंपती की याचिका पर यह आदेश पारित किया था, जिन्होंने सुरक्षा के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
क्या कहा था पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने?
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने कहा था कि मामले में विचार करने का मुद्दा शादी की वैधता के संबंध में नहीं था, बल्कि याचिकाकर्ताओं द्वारा उनके जीवन और स्वतंत्रता के लिए खतरे की आशंका को दूर करने के लिए था। इसने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पठानकोट को याचिकाकर्ताओं के प्रतिनिधित्व पर फैसला करने और कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।