सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर सरकार और जांच एजेंसियों से राज्य में हथियारों की बरामदगी पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला एवं जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने बुधवार को मणिपुर के मुख्य सचिव के हलफनामे पर भी गौर किया कि आर्थिक नाकेबंदी का सामना कर रहे लोगों के लिए भोजन और दवाओं जैसी बुनियादी वस्तुओं की आपूर्ति में कोई कमी नहीं है।
राज्य के शीर्ष अधिकारी ने कहा कि राहत शिविरों में चेचक और खसरे का कोई प्रकोप नहीं है जैसा याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों ने आरोप लगाया है। पीठ ने कहा कि मुख्य सचिव ने नौ शिविरों में राशन वितरित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी है। अगर इस तरह की कोई और शिकायत आती है तो इसे जिला प्रशासन के ध्यान में लाया जाना चाहिए। ऐसी किसी भी शिकायत का निपटारा शीघ्रता से किया जाना चाहिए। हथियारों की बरामदगी के मुद्दे पर पीठ ने कहा कि राज्य सरकार को एक स्थिति रिपोर्ट पेश करनी चाहिए। पीठ ने साफ किया कि रिपोर्ट केवल इस अदालत को उपलब्ध कराई जाएगी।
विशेषज्ञों के नामों के लिए जस्टिस मित्तल से संवाद करें केंद्रीय गृह सचिव : कई नए निर्देश जारी करते हुए पीठ ने केंद्रीय गृह सचिव को मणिपुर में राहत और पुनर्वास कार्यों की निगरानी के लिए शीर्ष अदालत से नियुक्त तीन सदस्यीय समिति को उसके कामकाज में मदद करने के लिए विशेषज्ञों के नामों को अंतिम रूप देने में समिति की अध्यक्ष जस्टिस (सेवानिवृत्त) गीता मित्तल के साथ संवाद करने का निर्देश दिया।
मुआवजा योजना के लिए उठाए कदमों पर भी मांगी जानकारी
पीठ ने मणिपुर सरकार को राज्य पीड़ित मुआवजा योजना को नालसा योजना के समान बनाने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में विवरण देते हुए एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया है। मामले में पेश होने वाले वकीलों के बारे में मुख्य सचिव के हलफनामे में किए गए संदर्भ पर पीठ ने कहा कि शपथपत्र में वकील के बारे में किए गए किसी भी संदर्भ को वकील पर किसी भी टिप्पणी के रूप में नहीं माना जाएगा। हम यह स्पष्ट करते हैं कि अदालत के समक्ष पेश होने वाले वकील अदालत के अधिकारी के रूप में ऐसा करते हैं और इस अदालत के प्रति जिम्मेदार हैं।
पोर्टल पर मांगी रिपोर्ट
पीठ ने राज्य सरकार को समिति के लिए पोर्टल बनाने के संबंध में एक स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान पीठ को जानकारी दी गई कि बड़ी संख्या में शव मुर्दाघर में पड़े हैं और उनका सम्मानजनक तरीके से अंतिम संस्कार किए जाने की जरूरत है। इस पर पीठ ने कहा कि सरकार को इस पर फैसला लेना होगा ताकि लावारिस शवों से बीमारी न फैले। पीठ ने कहा कि शवों को हमेशा के लिए मुर्दाघर में नहीं रखा जा सकता क्योंकि इससे महामारी फैल सकती है।