देश की 1300 से अधिक जेलों में 600 प्रतिशत तक अधिक बंदी रखे जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को बुरी तरह फटकार लगाई। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा, जेल में बंद ये व्यक्ति बंदी हैं, जानवर नहीं। यदि आप इन्हें सही तरह से नहीं रख सकते तो हमें इन्हें छोड़ देना चाहिए। न्यायालय ने इस स्थिति को सुधारने के लिए प्रतिबद्धता की कमी पर भी नाराजगी जताई।
जस्टिस एमबी लोकुर और दीपक गुप्ता की पीठ ने इस मामले में पहले दिए गए निर्णय के तहत ओवरलोड जेल की स्थिति सुधारने के लिए एक्शन प्लान अभी तक जमा नहीं कराने पर भी नाराजगी जताई और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशक (जेल) को अवमानना नोटिस जारी करने की चेतावनी दी।
न्यायालय ने कहा, यदि हम उन्हें जेल में रख भी नहीं सकते तो सुधार पर बात करने का क्या औचित्य है? न्यायालय ने कहा, इस मामले में तैनात न्यायमित्र ने बताया है कि देश की जेलों में न्यूनतम 150 फीसदी और अधिकतम 609 फीसदी तक क्षमता से ज्यादा कैदी हैं। कोर्ट ने 6 मई, 2016 व 3 अक्टूबर 2016 को दिए अपने निर्णयों में सभी राज्यों को 31 मार्च, 2017 तक ये प्लान जमा करने को कहा था। हालांकि न्यायालय को बताया गया कि ओपन जेल तैयार करने के लिए 30 अप्रैल, 2018 तक कानून तैयार कर लिया जाएगा।