चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करने का तर्क देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चयन प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से अराजकत और आभासी संवैधानिक विघटन होगा। गौरतलब है कि न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और दीपांकार दत्ता की दो सदस्यीय बेंच ने गुरुवार को चुनाव आयुक्तों (ईसी) ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू की नियुक्ति के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया था।
पैनल के सभी सदस्यों के पास उम्मीदवारों का पूर्ण विवरण होना चाहिए
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्तों के लिए अपनाई गई प्रक्रिया पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस तरह के चयन की प्रक्रिया के दौरान पैनल के सभी सदस्यों के पास उम्मीदवारों का पूर्ण विवरण होना चाहिए। गौरतलब है कि पैनल में प्रधानमंत्री, विपक्षी दल के नेता और नामित केंद्रीय मंत्री होता है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि वे चुने गए चुनाव आयुक्तों की योग्यता पर सवाल नहीं उठा रहे हैं, बल्कि उस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं, जिसके तहत चयन किया गया है।
नए निर्वाचन आयुक्तों पर कोई भी आरोप नहीं
नए कानून को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं से पीठ ने कहा कि इस समय हम कानून पर रोक नहीं लगा सकते हैं। इससे अव्यवस्था और अनिश्चितता की स्थिति पैदा होगी। हम अंतरिम आदेश के जरिए इस पर रोक नहीं लगा सकते। नए निर्वाचन आयुक्तों पर तो कोई भी आरोप नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह नहीं कहा जा सकता कि EC कार्यपालिका के अधीन है। देश में बहुत अच्छे चुनाव आयुक्त रहे हैं।