सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की बिजली कंपनियों को बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड (बीआरपीएल) और बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड (बीवाईपीएल) की बिजली आपूर्ति बंद करने से रोक दिया है और उन्हें अगले आदेश तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है। बिजली उत्पादन कंपनियों इंद्रप्रस्थ पावर जनरेशन कंपनी (आईपीजीसीएल) और प्रगति पावर कॉरपोरेशन (पीपीसीएल) ने बीआरपीएल और बीवाईपीएल को नोटिस जारी कर इन वितरण कंपनियों को बकाया भुगतान और आपूर्ति बंद करने की धमकी दी थी।
आठ सप्ताह बाद फिर होगी सुनवाई
न्यायमूर्ति एस ए नजीर और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यम की पीठ ने बिजली मंत्रालय, दिल्ली विद्युत नियामक आयोग, दिल्ली सरकार और अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। पीठ ने मामले को आठ सप्ताह बाद फिर से सुनवाई के लिए तय करते हुए कहा कि अगले आदेश तक यथास्थिति को बनाए रखा जाएगा। यह आदेश बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड द्वारा दायर एक याचिका पर आया है जिसमें आईपीजीसीएल, पीपीसीएल और अन्य को शीर्ष अदालत के पहले के आदेशों के अनुसार कार्य करने और उनके खिलाफ कोई कठोर कदम नहीं उठाने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
याचिका में कहा गया है कि शीर्ष अदालत ने 26 मार्च 2014 और 12 मई 2016 के अपने दो आदेशों द्वारा किसी भी दंडात्मक कार्रवाई के खिलाफ डिस्कॉम को सुरक्षा प्रदान की थी। याचिका में इन कंपनियों को निर्देश देने की मांग की गई है कि जब तक अदालत ने डिस्कॉम पर बकाया राशि को समायोजित करने के लिए एक उपयुक्त तंत्र का निर्धारण नहीं किया जाता, तब तक बिजली की आपूर्ति बंद न करें या कोई अन्य कठोर कदम न उठाएं।
याचिका में कहा गया है कि प्रतिवादियों की कार्रवाइयों के कारण ऐसी स्थिति पैदा हुई है जहां बीआरपीएल के पास कुल नकदी की कमी है और उसे अपने दैनिक कार्यों के लिए ऋण लेने के लिए मजबूर किया गया है, जो अपने आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान करने के कारण खत्म हो गया।