केंद्र सरकार ने 1984 में हुई त्रासदी के पीड़ितों को और मुआवजा दिलाने के लिए पहले हुए समझौते को दोबारा खोलना चाहती है। इस बाबत केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दाखिल की है। वहीं यूनियन कार्बाइड कॉरपोरेशन (यूसीसी) और उसकी उत्तराधिकारी कंपनियों का कहना है कि वे पूर्व में हुए फैसले के अतिरिक्त एक रुपया भी पीड़ितों को नहीं देगें।
1984 में हुई भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के लिए मुआवजे की रकम बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा दायर की गई क्यूरेटिव याचिका पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों वाली संविधान पीठ ने सभी पक्षों की दलीलों को सुना। इस याचिका पर संविधान पीठ ने पिछले तीन दिनों से लगातार सुनवाई की है।
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गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 1984 में हुई त्रासदी के पीड़ितों को और मुआवजा दिलाने के लिए पहले हुए समझौते को दोबारा खोलना चाहती है। इस बाबत केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दाखिल की है। वहीं यूनियन कार्बाइड कॉरपोरेशन (यूसीसी) और उसकी उत्तराधिकारी कंपनियों का कहना है कि वे पूर्व में हुए फैसले के अतिरिक्त एक रुपया भी पीड़ितों को नहीं देगें। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने 10 जनवरी को केंद्र की खिंचाई की थी। कोर्ट ने केंद्र से पूछा था कि यूनियन कार्बाइड कॉरपोरेशन भोपाल गैस त्रासदी पीड़ितों के संबंध में पहले हुए समझौते पर पुनर्विचार कैसे किया जा सकता है। अदालत ने केंद्र इस मुद्दे पर उसका स्टैंड पूछा था।